राम मंदिर चढ़ावा विवाद: अवधेश प्रसाद बोले- 'रामजी के दरबार में डकैती', दोषियों के लिए बने विशेष कानून
Ram Mandir Donation Row: अवधेश प्रसाद ने कहा, "इस्तीफे का कोई मतलब नहीं है. क्योंकि ये प्रकरण राष्ट्रव्यापी है. राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, ये चोरी नहीं डकैती है."

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर दान विवाद पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, "इस्तीफे का कोई मतलब नहीं है. क्योंकि ये प्रकरण राष्ट्रव्यापी है. राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, ये चोरी नहीं डकैती है. इस कांड ने प्रभु राम के मंदिर को कलंकित तो किया ही किया है, अयोध्या वासियों को भी घटना ने कलंकित किया है. कलंकित करने वाले लोगों के लिए सामान्य सजा नहीं इनके लिए विशेष कानून बनाकर सजा दी जाए. जिससे इतिहास इसे याद रखे कि प्रभु राम के मंदिर की डकैती का मामला है."
अयोध्या सांसद ने यह बयान राम मंदिर प्रबंधन में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के इस्तीफे पर दिया. उन्होंने आगे कहा कि प्रभु श्री राम के मंदिर में चंदा और चढ़ावा चोरी ने लोगों को कलंकित किया है. ऐसा करने वालों को विशेष सजा मिले, जरूरत पड़ने पर कानून भी बनाया जाए. सपा सांसद ने तुलसीदास की चौपाई दोहराते हुए कहा- 'जब-जब होई धर्म की हानि, उपजे असुर अधम अभिमानी'. बोले कि राम दरबार में चोरी हुआ है, भले सरकार बचा ले, लेकिन राम जी से कोई नहीं बचाएगा.
रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन नए महासचिव
चढ़ाव चोरी मामले के बाद सोमवार (6 जुलाई) को राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय, अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए, जबकि विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को ट्रस्ट से हटा दिया गया. इसमें रिटायर IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को नया महासचिव बना दिया गया है. वे अब चंपत राय और अनिल मिश्रा का कामकाज संभालेंगे.
इसके साथ ही मंदिर का प्रबंधन संभालने के लिए CEO की नियुक्ति की जरूरत के दृष्टिगत तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई. जिसमें रिटायर्ड जज प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल हैं. अब अगली बैठक 22 जुलाई को होने की संभावना है. वहीँ ट्रस्ट की ओर से कुल चंदा और सोने-चांदी के आभूषणों को भी दिखाया गया.
जून में हुआ था मामला उजागर
यहां बता दें कि राम मंदिर में दान चोरी-चढ़ावा चोरी का मामला जून के पहले सप्ताह में उजागर हुआ था. सबसे पहले इस मुद्दे को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उठाया था. इसके बाद शुरुआत में मंदिर प्रबंधन और बीजेपी ने इसे नकारा था, लेकिन कमर्चारियों के यहां नगदी और आभूषण बरामद होने के बाद मामला गर्मा गया और मंदिर प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे.























