इलाहबाद हाईकोर्ट का आदेश, नाबालिग पति को भी पत्नी-बच्चे को देना होगा भरण-पोषण
Prayagraj News: बरेली निवासी अभिषेक सिंह यादव की शादी 10 जुलाई 2016 को शीला देवी से हुई थी. वर्ष 2018 में दोनों को संतान हुई, लेकिन इसके बाद वैवाहिक संबंध बिगड़ गए. उस वक्त वो नाबालिग था.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि नाबालिग पति के खिलाफ भी भरण-पोषण का वाद दायर किया जा सकता है. न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 और 128 के तहत दाखिल आवेदन नाबालिगों पर भी लागू होते हैं. कोर्ट ने बरेली के पारिवारिक न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया.
बरेली निवासी अभिषेक सिंह यादव की शादी 10 जुलाई 2016 को शीला देवी से हुई थी. वर्ष 2018 में दोनों को संतान हुई, लेकिन इसके बाद वैवाहिक संबंध बिगड़ गए. पत्नी ने न केवल दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया बल्कि भरण-पोषण की मांग भी की. उस समय पति की उम्र लगभग 13 वर्ष बताई गई थी.
बरेली की निचली अदालत ने क्या कहा
पारिवारिक न्यायालय, बरेली ने आवेदन पर सुनवाई के बाद पत्नी के लिए 5,000 रुपये और बच्चे के लिए 4,000 रुपये प्रति माह भरण-पोषण तय किया. इस तरह कुल 9,000 रुपये मासिक भुगतान का आदेश दिया गया. निचली अदालत के इस आदेश को पति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी.
हाईकोर्ट में क्या क्या दलीलें दी गई
याची ने तर्क दिया कि वह नाबालिग था, इसलिए उसके खिलाफ भरण-पोषण का मामला नहीं चल सकता. उसने यह भी कहा कि पत्नी बिना कारण उसके साथ रहने से मना कर चुकी है, जिससे वह सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत भरण-पोषण की हकदार नहीं है. हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि सीआरपीसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि नाबालिग के खिलाफ आवेदन केवल उसके अभिभावक के माध्यम से ही दाखिल किया जाए.
हाइकोर्ट ने क्या कहा और क्या निर्णय दिया
हाईकोर्ट ने कहा कि आवेदन दाखिल करने के समय भले ही पति नाबालिग था, लेकिन निर्णय की तिथि तक वह बालिग हो चुका था. अदालत ने यह मानते हुए कि पति मजदूरी करता है, उसकी मासिक आय 18,000 रुपये मानी. सुप्रीम कोर्ट के रजनेश बनाम नेहा मामले का हवाला देते हुए अदालत ने भरण-पोषण की राशि घटाकर पत्नी के लिए 2,500 रुपये और बच्चे के लिए 2,000 रुपये कर दी. कुल 4,500 रुपये यानी पति की अनुमानित आय का 25 प्रतिशत तय किया गया.
हाइकोर्ट का अंतिम निर्देश
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई बकाया राशि बनती है तो उसकी गणना नई निर्धारित रकम के आधार पर की जाएगी. इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि बाल विवाह के मामलों में भी नाबालिग पति से पत्नी और संतान के भरण-पोषण का अधिकार छीना नहीं जा सकता.
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Source: IOCL
























