साल 1983 में बदायूं में हुई डकैती मामले पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तीन दोषियों को किया बरी
Allahabad High Court: हाई कोर्ट ने 1982 में बदायूं जिले में हुई डकैती की कथित घटना में संदेह का लाभ देते हुए और मामले में कमजोर अभियोजन के आधार पर बरी कर दिया

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 1983 में डकैती के आरोप में दोषी ठहराये गये तीन लोगों को बरी कर दिया है. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों में विसंगतियां मिलने की वजह से कोर्ट ने संदेह के आधार पर तीनों दोषियों को लाभ देते हुए रिहा करने का आदेश दिया है.
सोमवार को हाई कोर्ट की एक पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया और 1982 में बदायूं जिले में हुई डकैती की कथित घटना में संदेह का लाभ देते हुए और मामले में कमजोर अभियोजन के आधार पर बरी कर दिया.
दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला
न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीले सुनी, जिसके बाद ये फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान में कई महत्वपूर्ण विसंगतियां पाईं गई हैं, इसलिए आरोपियों को संदेह के आधार पर इसका लाभ दिया जाना चाहिए. जिसके बाद कोर्ट ने अली हसन, हरपाल और लटूरी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दे दिया है.
आपको बता दें कि यह पुरानी आपराधिक अपील 1983 में सात आरोपियों ने दायर की थी, जो 29 अगस्त, 1983 को बदायूं के विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत के सजा के फैसले के विरोध में थी.
जानें- क्या है पूरा मामला?
यह मामला 27 जुलाई, 1982 का है, जब उनके खिलाफ बदायूं के उझानी पुलिस थाना में भारतीय दंड संहिता की धारा 395 (डकैती की सजा) और 397 (जान से मारने या गंभीर चोट पहुंचाने की कोशिश के साथ डकैती) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
पीठ ने कहा, अली हसन को भारतीय दंड संहिता की धारा 395 के तहत अपराध के लिए बरी किया जाता है, जबकि हरपाल और लटूरी को भारतीय दंड संहिता की धारा 395 के साथ 397 के तहत अपराध से बरी किया जाता है. कोर्ट के आदेश के बाद तीनों को जल्द ही जेल से रिहा कर दिया जाएगा.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL


























