Aligarh News: अच्छी पैदावार के बावजूद आलू के दाम गिरे, किसानों को नहीं मिल रहा उचित मूल्य
Aligarh News In Hindi: अलीगढ़ में बंपर आलू पैदावार के बावजूद कीमतें गिर गईं है. जिससे किसानों को लागत भी नहीं मिल रही है. निर्यात घटने और अधिक आपूर्ति के कारण किसान फसल कोल्ड स्टोरेज में रख रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में इस बार आलू की पैदावार भले ही बंपर हुई हो, लेकिन बाजार में मिल रहे कम दामों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. जिसे सब्जियों का राजा कहा जाता है वही आलू इस बार कीमत के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है. खेतों में मेहनत और लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है. हालात यह हैं कि किसान अपनी फसल को कोल्ड स्टोरेज तक पहुंचाने के बाद भी भविष्य को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं.
दरअसल, पूरा मामला जिला अलीगढ़ का है जहां यह जिला लंबे समय से आलू उत्पादन के लिए जाना जाता है. जिले की कई तहसीलों और विधानसभा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है. विशेष रूप से इगलास विधानसभा क्षेत्र में आलू का उत्पादन काफी अधिक होता है. यहां के हजारों किसान अपनी आय का मुख्य स्रोत आलू की खेती को ही मानते हैं. यही वजह है कि जिले में आलू के भंडारण के लिए कई दर्जन कोल्ड स्टोरेज भी बनाए गए हैं, जहां किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखते हैं ताकि बाद में बेहतर कीमत मिलने पर उसे बाजार में बेचा जा सके. इस वर्ष मौसम ने भी किसानों का साथ दिया और आलू की फसल अच्छी तैयार हुई. खेतों में पैदावार इतनी अधिक हुई कि किसानों को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें अच्छा मुनाफा मिलेगा, लेकिन बाजार की स्थिति ने किसानों को निराश कर दिया है. आलू की आवक अधिक होने के कारण बाजार में कीमतें गिर गई हैं और किसानों को लागत के अनुरूप दाम नहीं मिल पा रहे हैं.
आलू की खेती पर खर्च होते है हजारों रुपये- किसान
किसानों का कहना है कि आलू की खेती में काफी मेहनत और खर्च आता है. बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च होते हैं. इसके बाद जब फसल तैयार होती है तो किसान उम्मीद करता है कि उसे अपनी उपज का उचित मूल्य मिलेगा. लेकिन इस बार आलू के दाम इतने कम हैं कि किसानों की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. आलू के दाम कम होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं.
किसानों और व्यापारियों के अनुसार इस बार देश के कई राज्यों में आलू की पैदावार अच्छी हुई है, जिसके कारण बाजार में आपूर्ति अधिक हो गई है. वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी असर देखने को मिल रहा है. बताया जा रहा है कि विदेशों में चल रहे युद्ध और व्यापारिक अस्थिरता के कारण इस बार आलू का निर्यात प्रभावित हुआ है. पहले जहां बड़ी मात्रा में आलू विदेशों में भेजा जाता था, वहीं इस बार निर्यात में कमी आई है.
कोल्ड स्टोरेज में फसल रखने को मजबूर किसान
किसानों के अनुसार, निर्यात कम होने के कारण बाजार में आलू की अधिकता हो गई है, जिससे कीमतों में गिरावट आ गई है. इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है. कई किसान अपनी फसल को कोल्ड स्टोरेज में रखने के लिए मजबूर हो गए हैं ताकि भविष्य में यदि कीमतें बढ़ें तो उन्हें बेहतर दाम मिल सकें. जिले के कई किसान बताते हैं कि आलू की खुदाई के समय उन्हें उम्मीद थी कि बाजार में अच्छे दाम मिलेंगे, लेकिन मंडियों में जब वे अपनी फसल लेकर पहुंचे तो कीमत सुनकर हैरान रह गए. कई जगहों पर आलू के दाम इतने कम मिल रहे हैं कि किसान उसे बेचने के बजाय भंडारण करना ही बेहतर समझ रहे हैं.
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किसानों को बाजार में नहीं मिल रही अपेक्षित कीमत- कालीचरण
इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय लोकदल के जिला अध्यक्ष और कोल्ड स्टोरेज संचालक कालीचरण एडवोकेट ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बताया कि इस बार आलू की पैदावार काफी अच्छी हुई है, लेकिन बाजार में अपेक्षित कीमत नहीं मिल पा रही है. उनका कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार आलू के दाम कम हैं, जिससे किसानों को निराशा हुई है. कालीचरण एडवोकेट का कहना है कि फिलहाल बाजार की स्थिति थोड़ी कमजोर है, लेकिन आने वाले समय में कीमतों में सुधार की संभावना है. जैसे-जैसे बाजार में मांग बढ़ेगी और स्टॉक कम होगा, वैसे-वैसे आलू के दाम भी बढ़ सकते हैं. उन्होंने किसानों से धैर्य रखने की अपील भी की है.
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