अलीगढ़ में दिल के रोगी बच्चों का होता है फ्री में इलाज, अबतक 1600 ऑपरेशन हुए
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकर कॉलेज में हृदय रोगों से संबंधित मुफ्त सर्जरी और इलाज की सुविधा उपलब्ध मिलती है. बच्चों के दिल की सर्जरी के लिए यहां 6 महीने तक की वेटिंग होती है.

Aligarh News: कहने को तो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उपक्रमों के द्वारा अलग-अलग विभागों में ख्याति प्राप्त की जा चुकी है लेकिन अगर अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज की बात कही जाए तो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के द्वारा अब तक कई ऐसे दिल के मरीजों का सफल इलाज किया है, जिनको लेकर प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के द्वारा हाथ खड़े कर दिए गए थे. लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने मेडिकल कॉलेज के द्वारा ऐसे मरीजों को नया जीवन देने का काम किया है. जिसको लेकर एक बार फिर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का मेडिकल कॉलेज सुर्खियों में है.
दरअसल पूरा मामला अलीगढ़ के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कालेज का है, जहां उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के चार प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को शामिल किया गया है. इनमें लखनऊ स्थित SGPGI (संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान), KGMU (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी), नोएडा का सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) का जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JNMC) शामिल हैं.
7 वर्षों में 1600 से अधिक बच्चों का सफल ऑपरेशन
इन संस्थानों में बच्चों के हृदय रोगों से संबंधित मुफ्त सर्जरी और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. खासकर JNMC अलीगढ़ में दिल की सर्जरी सबसे अधिक संख्या में की जाती है. पिछले सात वर्षों में यहां 1600 से अधिक बच्चों के हृदय ऑपरेशन किए जा चुके हैं. सरकार द्वारा यहां मिलने वाले फंड की मात्रा भी अन्य केंद्रों की तुलना में अधिक होती है. हर साल JNMC को 3 से 4 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. इस अस्पताल में कुल 20 बेड उपलब्ध हैं, जिसमें से 11 बेड आईसीयू (गहन चिकित्सा कक्ष) के लिए आरक्षित हैं. बच्चों के दिल की सर्जरी के लिए यहां 6 महीने तक की वेटिंग रहती है, जिससे साफ होता है कि यह केंद्र उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है.
JNMC के कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर आजम हसीन ने बातचीत में बताया कि सरकार ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चार चिकित्सा केंद्रों को इस कार्य के लिए नामित किया है. इन सभी केंद्रों पर 18 साल तक के बच्चों की हार्ट सर्जरी पूरी तरह से मुफ्त की जाती है. उन्होंने कहा कि हमारे संस्थान में बच्चों के दिल की लगभग सभी प्रकार की सर्जरी की जाती हैं. इनमें कई उच्च जोखिम (हाई-रिस्क) वाली सर्जरी भी शामिल होती है. यह उपलब्धि इसलिए संभव हो पाई है क्योंकि हमारे पास एक उत्कृष्ट चिकित्सा टीम उपलब्ध है. उन्होंने यह भी बताया कि हमारे पास कुशल नर्सिंग स्टाफ, अनुभवी डॉक्टर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं हैं, जिससे यह जटिल सर्जरी संभव हो पाती है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उच्च जोखिम वाली हार्ट सर्जरी के लिए और अधिक केंद्रों की आवश्यकता है.
सिद्धार्थनगर के ऋषभ की सफल सर्जरी की कहानी
हाल ही में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के 6 वर्षीय ऋषभ की जटिल हार्ट सर्जरी JNMC अलीगढ़ में की गई. ऋषभ जन्म से ही सांस लेने में कठिनाई महसूस करता था. जब वह रोता था, तो उसका चेहरा नीला पड़ जाता था. कुछ समय बाद उसे खून की उल्टियां भी होने लगीं, जिससे उसके माता-पिता चिंतित हो गए. अलग-अलग अस्पतालों में जांच कराने के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उसे "टेट्रालॉजी ऑफ फेलोट" नामक गंभीर जन्मजात हृदय दोष था. इस बीमारी के कारण ऋषभ का हृदय सही ढंग से कार्य नहीं कर रहा था. कई बड़े अस्पतालों ने इस उच्च जोखिम वाली सर्जरी को करने से मना कर दिया.
उच्च जोखिम वाली हार्ट सर्जरी के लिए पूरे उत्तर भारत में बहुत कम चिकित्सा संस्थान हैं, जहां छोटे बच्चों की सर्जरी की जाती है. अधिकांश केंद्र केवल बड़े बच्चों के लिए हार्ट सर्जरी करते हैं, क्योंकि छोटे बच्चों की सर्जरी में अत्यधिक जटिलताएं और जोखिम होते हैं.
सर्जरी के दौरान हुए महत्वपूर्ण कदम
इसी दौरान ऋषभ के परिवार को JNMC अलीगढ़ में बच्चों की उन्नत कार्डियक सर्जरी की सुविधा के बारे में जानकारी मिली. ऋषभ को JNMC में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शाद अबकरी के पास लाया गया. उन्होंने ऋषभ की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग में भेजा. सर्जरी की जिम्मेदारी डॉ. सैयद शमयाल रब्बानी के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ टीम को दी गई. इस टीम में शामिल थे. डॉ. मोहम्मद आजम हसीन, डॉ. आमिर मोहम्मद, डॉ. सबीर अली खान, डॉ. इरशाद शेख इन चिकित्सकों ने ऋषभ की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया.
डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान 50 मिनट तक ऋषभ के हृदय और फेफड़े को रोक दिया. इस दौरान जन्मजात दोषों को सावधानीपूर्वक ठीक किया गया.
डॉ. सबीर अली खान और इरशाद शेख ने हृदय और फेफड़े के कार्यों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया. डॉ. दीप्ति चानना, डॉ. निदा और डॉ. इमामुद्दीन की एनेस्थीसिया टीम ने भी अपनी भूमिका बखूबी निभाई. सर्जरी पूरी होने के बाद ऋषभ को पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल में रखा गया, जहां नर्सिंग टीम ने उसकी उत्तम देखभाल की.
JNMC की उपलब्धियों पर विशेषज्ञों की राय भी सामने आई है.
- प्रोफेसर मोहम्मद आजम हसीन
"यह JNMC और AMU दोनों के लिए गर्व का क्षण है कि हमारे संस्थान में इतनी जटिल और दुर्लभ हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की गई." - डॉ. शाद अबकरी
"भारत में केवल कुछ ही सरकारी अस्पताल हैं, जो इस तरह की जटिल सर्जरी कर सकते हैं. यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है." - डॉ. शमयाल रब्बानी
"टेट्रालॉजी ऑफ फेलोट की स्थिति में सर्जरी बेहद जटिल और उच्च जोखिम वाली होती है. लेकिन हमारी टीम ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया." - डॉ. आमिर मोहम्मद
"JNMC में हम लगातार जटिल हृदय सर्जरी में अपनी विशेषज्ञता को बढ़ा रहे हैं और दूर-दराज से आए मरीजों को भी सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा प्रदान कर रहे हैं."
JNMC में मुफ्त इलाज का लाभ कैसे उठाएं?
18 साल से कम उम्र के बच्चे जिनको हृदय संबंधी समस्या है, वे यहां फ्री इलाज के लिए आवेदन कर सकते हैं. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार का खर्च नहीं उठाना पड़ता. जरूरतमंद परिवार सरकारी अस्पतालों से रेफर होकर यहां इलाज के लिए पहुंच सकते हैं. JNMC, अलीगढ़ उत्तर प्रदेश का प्रमुख हृदय सर्जरी केंद्र बन चुका है. यहां 1600 से अधिक सफल सर्जरी हो चुकी हैं. सरकार द्वारा सबसे अधिक आर्थिक सहायता भी इसी केंद्र को दी जाती है. विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम यहां दुर्लभ और जटिल हृदय सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देती है. यह निस्संदेह गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए एक वरदान है.
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Source: IOCL






















