अलीगढ़ की विरासत को मिलेगी पहचान, 200 किलो के दो ताले करेंगे लोगों का वेलकम!
अलीगढ़ की विरासत को अब पहचान मिलने जा रही है. अलीगढ़ में प्रवेश करते ही अब लोगों का स्वागत विशालकाय दो ताले करेंगे. इसे दिवाली से पहले जनता को समर्पित करने की तैयारी है.

ताला नगरी के नाम से देश-दुनिया में अपनी पहचान रखने वाले अलीगढ़ में प्रवेश करते ही अब लोगों को शहर की औद्योगिक ताकत, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था की अनूठी झलक देखने को मिलेगी. जीटी रोड पर महरावल कट के निकट नगर निगम की ओर से तैयार कराया जा रहा भव्य प्रवेश द्वार शहर की नई पहचान बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
इस प्रवेश द्वार की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित किए जाने वाले 200-200 किलोग्राम वजन के दो विशालकाय ताले होंगे. इनके जरिए अलीगढ़ की प्रसिद्ध ताला इंडस्ट्री को आकर्षक अंदाज में प्रदर्शित किया जाएगा. करीब तीन करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में बताया जा रहा है. इसे दिवाली से पहले जनता को समर्पित करने की तैयारी है.
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ताला उद्योग के इतिहास को बताएगा विशालकाय द्वार
प्रवेश द्वार को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि शहर में आने वाले लोगों को अलीगढ़ की पहचान से परिचित कराने के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की जरूरत न पड़े. यहां ताला उद्योग के इतिहास, धार्मिक स्थलों, सांस्कृतिक परंपराओं और आधुनिक शहरी विकास को एक ही परिसर में प्रदर्शित करने की योजना है. आकर्षक लाइटिंग, कलात्मक मूर्तियां, हरियाली और सेल्फी प्वाइंट इस स्थान को खास बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे.
102 फीट चौड़ा और 26 फीट ऊंचा होगा प्रवेश द्वार
जीटी रोड पर बनाया जा रहा यह प्रवेश द्वार आकार और डिजाइन के लिहाज से काफी भव्य है. इसकी चौड़ाई करीब 102 फीट और ऊंचाई 26 फीट रखी गई है. इसके निर्माण में लगभग 60 टन लोहे का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है. प्रवेश द्वार के लिए रायपुर से लोहा और हापुड़ से एचपीएल शीट मंगवाई गई है. मजबूत ढांचे के साथ इसकी बाहरी सजावट पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि यह दूर से ही लोगों को आकर्षित कर सके.
द्वार के ऊपरी हिस्से पर अंग्रेजी में 'वेलकम टू अलीगढ़' लिखा होगा. यह संदेश शहर में प्रवेश करने वाले लोगों का स्वागत करेगा. इसके खंभों पर भगवद्गीता और देवी भागवत से जुड़े संस्कृत श्लोक भी अंकित किए गए हैं. इस प्रकार प्रवेश द्वार पर आधुनिक निर्माण शैली के साथ भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी स्थान दिया गया है.
200-200 किलो के तालों से मिलेगी ताला नगरी को नई पहचान
अलीगढ़ के प्रवेश द्वार पर स्थापित होने वाले दो विशाल ताले इस पूरी परियोजना का मुख्य आकर्षण होंगे. इन तालों को मुरादाबाद में तैयार कराया गया है. प्रत्येक ताले की लंबाई लगभग साढ़े आठ फीट और चौड़ाई डेढ़ फीट बताई गई है. इनका वजन करीब 200-200 किलोग्राम है. ताले के साथ उनकी बड़ी चाबियां भी तैयार कराई गई हैं, जो अपने आकार और बनावट के कारण लोगों का ध्यान खींचेंगी.
इन तालों को सुनहरे रंग में सजाया जाएगा, जिससे रात में रोशनी के बीच इनकी चमक और अधिक आकर्षक दिखाई देगी. इन्हें प्रवेश द्वार पर लगाने का उद्देश्य अलीगढ़ की उस औद्योगिक पहचान को प्रमुखता देना है, जिसके कारण शहर को ताला नगरी के नाम से जाना जाता है.
अलीगढ़ का ताला उद्योग लंबे समय से स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार का महत्वपूर्ण आधार रहा है. यहां तैयार होने वाले तालों की पहचान देश के विभिन्न हिस्सों तक है. ऐसे में प्रवेश द्वार पर विशाल तालों की स्थापना शहर की पारंपरिक कारीगरी और औद्योगिक विरासत को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का एक प्रयास है.
पार्क में दिखेगी अलीगढ़ की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत
प्रवेश द्वार के एक ओर विकसित किए जा रहे पार्क को भी विशेष रूप दिया जा रहा है. यहां म्यूरल आर्ट के माध्यम से अलीगढ़ के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को दर्शाया गया है. इनमें श्री खेरेश्वर मंदिर, अलीगढ़ किला, अचल सरोवर और स्वामी हरिदास मंदिर शामिल हैं. इन कलाकृतियों को दिल्ली के कलाकारों ने तैयार किया है.
इन चित्रों के माध्यम से शहर की ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक महत्व को एक ही स्थान पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है. पार्क में आने वाले लोग इन कलाकृतियों को देखकर अलीगढ़ के प्रमुख स्थलों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. यह व्यवस्था शहर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ उसकी विरासत को संरक्षित और प्रचारित करने में भी उपयोगी साबित हो सकती है.
पार्क में हरियाली विकसित करने, पौधे लगाने और सजावटी व्यवस्था तैयार करने की योजना है. यहां बैठने के लिए स्थान भी बनाया जाएगा, ताकि लोग कुछ समय रुककर परिसर का आनंद ले सकें. आधुनिक लैंडस्केपिंग के माध्यम से पूरे क्षेत्र को आकर्षक स्वरूप देने की तैयारी है.
ताला बनाने की कहानी बताएगी विशेष प्रतिमा
इस प्रवेश द्वार परिसर में एक व्यक्ति की कलात्मक प्रतिमा भी स्थापित की गई है. प्रतिमा में व्यक्ति को कुर्सी पर बैठे हुए दिखाया गया है. उसके हाथ में ताला और चाबी हैं. इस कलाकृति के माध्यम से अलीगढ़ में ताला बनाने की शुरुआत और उससे जुड़ी परंपरा को दर्शाने का प्रयास किया गया है.
प्रतिमा के पास बनाए गए ग्लोब पर भी ताले को प्रदर्शित किया गया है. इसका उद्देश्य अलीगढ़ के तालों की पहचान को वैश्विक स्तर से जोड़कर दिखाना है. यह कलाकृति केवल सजावट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शहर की औद्योगिक यात्रा और उसकी विशिष्ट पहचान का प्रतीक भी बनेगी.
इस तरह प्रवेश द्वार पर विशाल ताले, ताला बनाने वाले व्यक्ति की प्रतिमा और ग्लोब को एक साथ रखकर अलीगढ़ के उद्योग को केंद्र में लाने की योजना बनाई गई है. इससे स्थानीय उद्योग और पारंपरिक कारीगरी को नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करने का अवसर भी मिलेगा.
1.68 लाख एलईडी लाइटों से जगमगाने की तैयारी
प्रवेश द्वार को दिन के साथ-साथ रात में भी आकर्षक बनाने के लिए व्यापक प्रकाश व्यवस्था की योजना तैयार की गई है. इसके लिए करीब 1.68 लाख एलईडी लाइटें और 60 बोलार्ड लाइटें लगाने की योजना बताई गई है. रोशनी की व्यवस्था इस तरह विकसित की जाएगी कि प्रवेश द्वार की बनावट, विशाल ताले और कलात्मक संरचनाएं रात में भी स्पष्ट दिखाई दें.
इसके आसपास बने पार्क में भी लाइटें लगाई जाएंगी. पौधरोपण, ग्रीन बेल्ट, ट्राइगार्ड, गमले और आधुनिक लैंडस्केपिंग के जरिए परिसर को व्यवस्थित और सुंदर बनाया जाएगा. इसके अलावा सेल्फी प्वाइंट विकसित करने की योजना है, जहां लोग तस्वीरें लेकर इस स्थान को अपनी यादों का हिस्सा बना सकेंगे.
नगर निगम के अनुसार 90 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा के अनुसार, परियोजना को लगभग 2.23 करोड़ रुपये की लागत से 90 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके तहत भव्य प्रवेश द्वार के साथ आकर्षक लाइटिंग, पौधरोपण, ट्राइगार्ड, गमले, ग्रीन बेल्ट, सेल्फी प्वाइंट, म्यूरल आर्ट, कलात्मक मूर्तियां, बैठने की व्यवस्था और आधुनिक लैंडस्केपिंग जैसी सुविधाओं का विकास किया जाना है.
नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम शहर के सौंदर्यीकरण और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. यह परियोजना केवल एक प्रवेश द्वार बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अलीगढ़ की सकारात्मक और आधुनिक छवि को मजबूत करना भी है.
निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों और समयसीमा के अनुरूप पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि शहर में प्रवेश करने वाले नागरिकों को आकर्षक और यादगार अनुभव मिल सके. परियोजना की लागत को लेकर उपलब्ध विवरण में करीब तीन करोड़ रुपये और नगर आयुक्त के बयान में लगभग 2.23 करोड़ रुपये का उल्लेख है. अंतिम लागत की स्थिति संबंधित विभाग के आधिकारिक विवरण से स्पष्ट होगी.
महापौर बोले- अलीगढ़ की नई पहचान बनेगा प्रवेश द्वार
महापौर प्रशांत सिंघल ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में विकसित किया जा रहा यह प्रवेश द्वार अलीगढ़ की नई पहचान बनेगा. 'वेलकम टू अलीगढ़' की थीम पर तैयार की जा रही इस परियोजना में शहर की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास को एक साथ प्रस्तुत किया जाएगा.
महापौर के मुताबिक, नगर निगम का उद्देश्य अलीगढ़ में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को शहर की स्वच्छता, सुंदरता और विकास की पहली झलक दिखाना है. प्रवेश द्वार के जरिए शहर की पारंपरिक पहचान को आधुनिक स्वरूप में सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है.
दिवाली से पहले उद्घाटन की तैयारी
निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी के संचालक शिवांग माहेश्वरी के मुताबिक, प्रवेश द्वार का अधिकांश काम पूरा हो चुका है. शेष कार्यों में सजावट, प्रकाश व्यवस्था और परिसर के सौंदर्यीकरण से संबंधित व्यवस्थाएं शामिल हैं. परियोजना पूरी होने के बाद यहां आने वाले लोगों को अलीगढ़ की औद्योगिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान एक ही स्थान पर देखने को मिलेगी,दिवाली से पहले इसके उद्घाटन की तैयारी की जा रही है.
हालांकि, उद्घाटन की अंतिम तारीख और परियोजना के पूर्ण होने की आधिकारिक पुष्टि संबंधित नगर निगम अधिकारियों की ओर से की जानी बाकी है. कुल मिलाकर, महरावल कट के निकट बन रहा यह प्रवेश द्वार अलीगढ़ के लिए एक नए आकर्षण के रूप में सामने आ रहा है.
विशालकाय तालों से ताला नगरी की पहचान, धार्मिक स्थलों की कलाकृतियों से सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक रोशनी व हरियाली से शहर के विकास को प्रदर्शित करने की कोशिश की जा रही है. अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि परियोजना कब पूरी तरह तैयार होकर आम जनता के लिए खोली जाती है और यह नया प्रवेश द्वार शहर की पहचान को किस तरह नई ऊंचाई देता है.





















