Ram Mandir Case: महंत विष्णु दास को SIT पर भरोसा नहीं, न्यायिक जांच की मांग की
Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर चंदा चोरी मामले में महंत विष्णु दास की ओर से SIT जांच पर अविश्वास जताया गया है. सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच और बुलडोजर कार्रवाई की मांग की गई है.

राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर निर्वाणी अणी अखाड़े के महंत और अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के क्षेत्रीय अध्यक्ष, महंत विष्णु दास जी महाराज की ओर से एक बड़ा और कड़ा बयान जारी किया गया है. उनके बयान में उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी (SIT) जांच पर पूरी तरह से अविश्वास जताया गया है. इस पूरे मामले की सच्चाई को सामने लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में एक स्वतंत्र समिति का गठन कर, न्यायिक जांच कराए जाने की मांग रखी गई है.
'न्यायिक जांच के बिना नहीं सामने आएगी पूरी कहानी'
महंत विष्णु दास की ओर से स्पष्ट किया गया है कि न्यायिक जांच के बिना न तो चंदा चोरी की पूरी कहानी को सामने लाया जा सकेगा और न ही असली दोषियों तक जांच पहुंच पाएगी. यह भी कहा गया है कि अब तक जो भी कार्रवाई की गई है, उसे पूरे मामले का खुलासा बिल्कुल नहीं माना जा सकता है.
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आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने की मांग
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की गई है कि जिन लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है, उनके खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की जाए. बयान में कहा गया है कि अब तक की जांच से यह साफ हो चुका है कि गिरफ्तार किए गए सभी आठ लोगों की इस चंदा चोरी में बड़ी भूमिका रही है. ऐसे में आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाकर सरकार की तरफ से एक कड़ा संदेश दिए जाने की मांग की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
'चंपत राय और गोविंद देव से भी हो पूछताछ'
यह दावा भी किया गया है कि अभी तक गिरफ्तार किए गए आठ लोग महज मोहरे हैं, जबकि इस पूरे खेल के असली खिलाड़ियों को सामने लाया जाना अभी बाकी है. जांच को सिर्फ निचले स्तर तक सीमित न रखकर, पूरे नेटवर्क का खुलासा किए जाने पर जोर दिया गया है.
इसके अलावा, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष गोविंद देव पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं और उन्हें भी कानूनी जांच के दायरे में लाए जाने की मांग उठाई गई है. तर्क दिया गया है कि बिना उच्च पदाधिकारियों की जानकारी के इतना बड़ा वित्तीय घोटाला होना संभव नहीं लगता, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए इन पदाधिकारियों से भी पूछताछ की जानी चाहिए और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.
संत समाज और राम भक्तों में गहरी निराशा
हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले को गंभीरता से लिए जाने और जल्द ही कोई ठोस एवं सख्त फैसला किए जाने की उम्मीद भी जताई गई है, जिससे लोगों का विश्वास दोबारा कायम किया जा सके. कहा गया है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है और चंदे में गड़बड़ी की इस खबर से संत समाज के साथ-साथ करोड़ों राम भक्तों को गहरा आघात पहुंचाया गया है. इस घटना से लोगों की भावनाएं आहत होने और संत महात्माओं की आत्मा के दुखी होने की बात कही गई है. अंत में यह दोहराया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में किसी की तरफ से भी धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न की जा सके.

























