राजस्थान: कांग्रेस MLA ने उठाया छात्रों से करोड़ों रुपये वसूलने का मुद्दा, विधानसभा में हंगामा
Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा में विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों से 'विमर्श शुल्क' के नाम पर 223 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का मुद्दा गरमाया.

राजस्थान विधानसभा में 'विमर्श शुल्क' (Consultation Fee) के नाम पर प्रदेश के विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों से करोड़ों रुपये वसूलने का मुद्दा गूंजा. शाहपुरा से कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया. आरोप है कि विश्वविद्यालयों ने बिना किसी विमर्श या परामर्श केंद्र के 22.50 लाख विद्यार्थियों से करीब 223 करोड़ रुपये वसूल लिए. मंत्री द्वारा संतोषजनक जवाब न दे पाने पर सदन में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया.
क्या है पूरा मामला?
विधायक मनीष यादव ने सवाल उठाया कि मत्स्य विश्वविद्यालय, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय और राजस्थान विश्वविद्यालय में 2016-17 से स्वयंपाठी (Non-collegiate) विद्यार्थियों से 'विमर्श शुल्क' के नाम पर 1000-1000 रुपये लिए जा रहे हैं.
- सरकार की ओर से मंत्री प्रेम चंद बैरवा ने जवाब में आंकड़ों का खुलासा किया:
- राजऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय: 22.16 करोड़ (2018-19 से 24-25 तक)
- मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय: 43.16 करोड़ (2020-21 से 24-25 तक)
- राजस्थान विश्वविद्यालय: 156.18 करोड़ (2017-18 से 24-25 तक)
- कुल वसूली: लगभग 22.50 लाख छात्रों से करीब ₹223 करोड़.
मंत्री की दलील पर भड़का विपक्ष
मंत्री ने सदन को बताया कि इस राशि का उपयोग 'परीक्षा संबंधी कार्यों' में किया गया है. इस पर विधायक मनीष यादव ने कड़ा विरोध जताया. उन्होंने तर्क दिया कि जब छात्रों से 'परीक्षा शुल्क' अलग से लिया जाता है, तो 'विमर्श शुल्क' का पैसा परीक्षा में कैसे खर्च किया गया?. यादव ने पूछा, "कितने विमर्श केंद्र खुले? कितने छात्रों को परामर्श दिया गया? अगर नहीं, तो यह छात्रों की जेब पर सीधा डाका है."
'एक्ट नहीं, आदेश दिखाएं मंत्री'
सदन में स्थिति तब और गरमा गई जब मंत्री ने विश्वविद्यालय अधिनियम (Act) का हवाला देने के बजाय विभागीय आदेश पढ़ना शुरू कर दिया. इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को घेरते हुए कहा, "मंत्री जी, आप सदन को गुमराह कर रहे हैं. आप आदेश मत पढ़िए, वह एक्ट बताइए जिसके तहत स्वयंपाठी छात्रों से यह शुल्क वसूलने का प्रावधान है."
विपक्ष की मांग: पैसा वापस करें
विपक्ष ने आरोप लगाया कि 223 करोड़ में से एक रुपया भी छात्रों के वास्तविक विमर्श पर खर्च होने का प्रमाण सरकार नहीं दे पाई. विधायक मनीष यादव और नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि इस अवैध वसूली को तत्काल बंद किया जाए. छात्रों से अब तक वसूले गए करोड़ों रुपये उन्हें लौटाए जाएं. महामहिम राज्यपाल इस मामले में हस्तक्षेप कर उच्च स्तरीय जांच करवाएं.
Source: IOCL


























