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Kota News: इलेक्ट्रोपैथी के डॉक्टर्स ने सरकार से की सरकारी सेवाओं में शामिल करने की मांग, जानिए- क्या है इलेक्ट्रोहोम्योपैथी?

Rajasthan: इलेक्ट्रोपैथी डॉक्टरों की सरकार से मांग है कि सरकारी सेवाओं में इसे शामिल करने की बात कही. साथ ही इन्हें अन्य प्रदेशों में मान्यता देने और जो समस्याएं आ रही हैं उन्हें दूर करने की बात कही.

Rajasthan News: इलेक्ट्रोहोम्योपैथी एक ऐसी पद्विति है जो पूरी तरह प्राकृतिक, हर्बल, रसायन रहित और बिना साइड इफेक्ट पर काम करती है, लेकिन उसके बाद भी इलेक्ट्रोपैथी के चिकित्सकों को अपने वजूद को बचाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. यदि सरकार इन पद्धिति का विशलेषण कर इसका अलग संविधान बना दें तो देश के लाखों इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सकों का सपना साकार होगा साथ ही देश के आमजन को प्राकृतिक औषधीय उपचार मिल सकेगा. ऐसा ही कुछ मंथन कोटा में आए करीब 700 चिकित्सक कर रहे हैं.

विशेष विशेषज्ञों ने कहा कि जिस तरह आज के इस भौतिकवादी व आधुनिक युग में निरंतर विकास हो रहा है. उसी विकास के साथ आज नित नए-नए असाध्य रोग भी जन्म लेते जा रहे हैं. लोग भागदौड़ व थकानभरी जिंदगी में मानसिक तनाव व विभिन्न रोगों से ग्रस्त होते जा रहे हैं. मानव जाति के पृथ्वी पर आगमन के साथ ही अनेक आर्युविद्याओं का भी उपयोग स्वस्थ व निरोग रहने के लिए मानव जाति करने लगी थी. भांति-भांति के विकास और विज्ञान की प्रगति ने आर्युविज्ञान को भी अछूता नहीं छोड़ा और विभिन्न प्रकार की चिकित्सा पद्धतियां विकसित हुई. 

100 प्रकार की चिकित्सा पद्धतियां
इसमें आयुर्वेद, नैचुरोपैथी, एलोपैथी, यूनानी, होमियोपैथी, एक्यूपंचर आदि कोई 100 प्रकार की चिकित्सा पद्धतियां आज दिखाई देती है. सभी पद्धतियां अपना-अपना महत्व रखती हैं. इसी उद्देश्य से इलैक्ट्रोपैथी पद्धति का जन्म हुआ. अब तक की सभी पद्धतियों से बिल्कुल भिन्न ये पद्धति इलाज के लिए कारगर साबित हो रही है. संरक्षक डॉ. आरबी गुप्ता ने बताया कि इस कांफ्रेंस के माध्यम से देश भर के इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सक यहां पर अत्याधुनिक तकनीक के साथ वर्तमान परिपेक्ष में लोगों की बीमारियों का निदान किस तरह से इलेक्ट्रोपैथी में किया जा सकता है, इस पर मंथन किया जा रहा है.

इलेक्ट्रोपैथी में अधिकांश बीमारियों सफल उपचार
इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष हेमंत सेठिया ने बताया कि इलेक्ट्रोपैथी में  सम्पूर्ण उपचार है. इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि देश में इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा से सेवाएं देने वाले लाखों लोग हैं जो काम कर रहे हैं, शोध कर रहे हैं. इलेक्ट्रोपेथी पूरी तरह से हर्बल है. ये होम्योपैथी से अलग है. इलेक्ट्रोपैथी से लिया गया उपचार कारगर है. 80 प्रतिशत तक रोगी स्वास्थ्य लाभ लेते हैं.

सरकारी सेवा में किया जाए शामिल
डॉ. आनंद प्रसाद मौर्य अध्यक्ष काउंट मेटी इलेक्ट्रोहोम्योपैथी फोरम वेस्ट बंगाल ने बताया कि इस मंच के माध्यम से उन्होंने देशभर के इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सकों की मांग सरकार के सामने रखी और नियम बनाकर सरकारी सेवाओं में इसे शामिल करने की बात कही. साथ ही इन्हें अन्य प्रदेशों में मान्यता देने और जो समस्याएं आ रही हैं उन्हें दूर करने की बात कही. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोपैथी की दवाएं जटिल से जटिल रोगों में भी अपना प्रभाव दिखाती हैं, जैसे कि किडनी स्टोन, गॉलब्लैडर स्टोन, यूटरिन फाइब्रॉयड और पेट की सभी समस्याओं को ठीक करने में कारगर है.
 
पौधों पर आधारित है पूरी पैथी
डॉ. शादाब अहमद, वरिष्ठ चिकित्सक आबिद खान ने इलेक्ट्रोपैथी की वर्तमान उपयोगिता को बताया. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोपैथी की सभी औषधियां वनस्पति जगत से निर्मित हैं. इस पद्धति के अलावा अन्य पद्धतियों में औषधियों का निर्माण पादप जगत के अलावा खनिज लवण जीव जंतु और संश्लेषित रसायनों द्वारा होता है और यह औषधियां मानव शरीर पर कई हानिकारक और अहित कारक प्रभाव डालती हैं. इस एकमात्र चिकित्सा पद्धति की संपूर्ण औषधियां पूर्णरूपेण पौधों पर आश्रित होने के कारण हानि रहित होती हैं.

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