राजस्थान जेल में गूंजेंगी शहनाइयां! पति की हत्या की दोषी महिला से शादी करेगा कैदी, HC की मंजूरी
Rajasthan High Court News: मुलाराम, नागौर जिले के एडसिंगा गांव का निवासी है. उसे वर्ष 2023 में पड़ोसी की हत्या मामले में दोषी ठहराया गया था. वहीं सीमा अपने पति की हत्या के मामले में सजा काट रही है.

जोधपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम और मानवीय फैसला सुनाते हुए हत्या के मामले में सजायाफ्ता दो बंदियों को शादी करने की अनुमति दे दी है. जोधपुर के मंडोर स्थित ओपन एयर कैंप में रहने वाले बंदी मुलाराम और पैरोल पर बाहर आई सजायाफ्ता महिला सीमा अब अदालत की अनुमति से शादी बंधन में बंध सकेंगे.
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि दो बालिग व्यक्तियों का अपनी स्वतंत्र इच्छा से शादी करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है.
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शांतिपूर्ण ढंग से शादी कराने के निर्देश
अदालत ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित नियमों और सुरक्षा व्यवस्था के साथ शादी समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाए. याचिकाकर्ता मुलाराम, नागौर जिले के एडसिंगा गांव का निवासी है. उसे वर्ष 2023 में पड़ोसी की हत्या, साक्ष्य मिटाने और संपत्ति के दुरुपयोग के मामले में दोषी ठहराया गया था.
वहीं सीमा अपने पति की हत्या के मामले में सजा काट रही है. वर्ष 2017 से मुलाराम जेल में बंद रहने और अच्छे आचरण के कारण उसे मंडोर ओपन एयर कैंप में रखा गया है. वहीं, सीमा भी हत्या के मामले में सजायाफ्ता है और वर्तमान में पैरोल पर बाहर है.
दोनों पक्षों ने कोर्ट से जताई शादी की इच्छा
दोनों पक्षों की ओर से अदालत को बताया गया कि वे अपनी इच्छा से शादी करना चाहते हैं और यह कदम उनके सामाजिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण होगा. राज्य सरकार ने भी अपनी रिपोर्ट में दोनों की शादी करने की इच्छा की पुष्टि करते हुए कहा कि नियमों के अनुरूप ओपन एयर कैंप में शादी कराने पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है.
हाईकोर्ट ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि शादी समारोह में पंडित सहित दोनों पक्षों के अधिकतम 21-21 परिजनों को शामिल होने की अनुमति होगी. विशेष परिस्थितियों में जेल प्रशासन अपने विवेक से अतिरिक्त लोगों को भी प्रवेश दे सकेगा.
प्रशासन को पहले बतानी होगी शादी की तारीख
शादी की तिथि पहले से प्रशासन को बतानी होगी तथा सुरक्षा, अनुशासन और ओपन एयर कैंप की गरिमा बनाए रखने से जुड़े सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा. शादी का पूरा खर्च दोनों पक्ष स्वयं वहन करेंगे.
यह फैसला न केवल संवैधानिक अधिकारों की पुष्टि करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सजा काट रहे बंदियों के सामाजिक पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन के अधिकार को भी न्यायपालिका गंभीरता से देख रही है.
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