राजस्थान में 45 साल में 90 प्रतिशत घटे ऊंट, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब; पशुपालन निदेशक तलब
Rajasthan News In Hindi: राजस्थान के राज्य पशु ऊंट की लगातार घटती संख्या पर राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाब तलब करते हुए पशुपालन विभाग के निदेशक को अगली सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं.

राजस्थान के राज्य पशु ऊंट की लगातार घटती संख्या को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. अदालत ने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में प्रदेश की पहचान रहे ऊंट का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए पशुपालन विभाग के निदेशक को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं. वहीं हाथी गांव में हाथियों की दुर्दशा और एक हथिनी की मौत के मामले में भी अदालत ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को तलब किया है.
राजस्थान में पिछले 45 सालों में ऊंटों की संख्या में 90 प्रतिशत की गिरावट
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने रखे गए रिकॉर्ड में सामने आया कि पिछले करीब 45 सालों में राजस्थान में ऊंटों की संख्या में करीब 90 प्रतिशत की गिरावट आई है. आंकड़ों के मुताबिक 1980 में प्रदेश में 15 लाख ऊंट थे, जो 2004 में घटकर 7.50 लाख रह गए. इसके बाद 2015 में यह संख्या 3.26 लाख, 2019 में 2.13 लाख और 2021 में केवल 1.50 लाख रह गई. मौजूदा समय में ऊंट की संख्या घटकर सिर्फ एक लाख के करीब रह गई है.
लगातार घटती यह संख्या अदालत की चिंता का बड़ा कारण बनी. कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जब ऊंट को राज्य पशु का दर्जा दिया गया है तो उसके संरक्षण के लिए अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं. अदालत ने यह भी जानना चाहा कि ऊंटों की संख्या में लगातार गिरावट के पीछे क्या कारण हैं और उन्हें बचाने के लिए सरकार की क्या कार्ययोजना है.
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हाईकोर्ट ने सरकार से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के दिए निर्देश
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि ऊंटों के संरक्षण के लिए कानून बनाए जाने के बावजूद उनकी संख्या लगातार घटती रही है. इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए. अदालत ने इसके अलावा हाथी गांव में हाथियों की देखभाल और हाल ही में हुई एक हथिनी की मौत के मामले को भी कोर्ट ने गंभीरता से लिया. अदालत ने कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण और उनके कल्याण से जुड़े नियमों का प्रभावी पालन होना चाहिए. अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को दोनों मामलों में विस्तृत जवाब देना होगा.























