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राजस्थान: 26 साल बाद बिछड़ा भाई मिला, कारगिल युद्ध से अलग हुए फौजी भाइयों का भावुक मिलन
Bharatpur News: भरतपुर के अपना घर आश्रम में 26 साल बाद राकेश जाे कारगिल का युद्ध में बिछड़े गए थे, वह अपने परिजनों से मिल गए हैं. उन्होंने कहा हम दोनों आर्मी में थे. वह पढ़ाई के डर से कहीं चला गया था.

26 साल बाद घर वापसी
Source : Social Media/X
राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित अपना घर आश्रम में दीन दुखियों, बेशहराओं और परित्यक्ता व् मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों की सेवा प्रभु जी मानकर की जाती है. अपना घर आश्रम में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी राकेश जो अपने परिवार से बिछड़ गया था वह 26 वर्ष बाद अपने परिजनों दोनों भाइयों से मिल सका.
इसके बाद भरतपुर के अपना घर आश्रम से 26 वर्ष पूर्व बिछडे भाई राकेश को उनके भाई मुनेश कुमार एवं बबलू कुमार को सौपा गया. इस मामले में भाई मुनेश कुमार ने बताया कि मैं और मेरा भाई रजनीश दोनों आर्मी में थे. हमारा छोटा भाई राकेश घर रहकर पढ़ाई कर रहा था. वह पढ़ाई में कमजोर था.
कारगिल का युद्ध के दौरान पढाई के डर से घर से कहीं चला गया
इसके बाद वर्ष 1999 का कारगिल का युद्ध चल रहा था. उसी दौरान हमारा तीसरा भाई राकेश कुमार जून 1999 में बिना बताए पढाई के डर से घर से कहीं चला गया था. राकेश को सभी जगह तलाशा गया. भाई राकेश का लम्बे समय तक सुराग नहीं लगने के कारण परिवार ने मान लिया था कि राकेश ने कहीं आत्महत्या कर ली हो क्योंकि अगर वह जिन्दा होता तो वापस घर जरूर आ जाता इसलिए परिजन उसे मृत मान चुके थे.
राकेश घर से निकल कर गुजरात चला गया और काम की तलाश करने लगा लेकिन उसकी उम्र 14 वर्ष की नाबालिग होने के कारण कहीं काम नहीं मिला तो इधर-उधर भटकता रहा. जब वह बडा हुआ तो एक कारखाने में नौकरी करने लगा. एक साल पहले राकेश फैक्ट्री में काम करते समय केमिकल से जल गया. पैसे नहीं होने के कारण इलाज नहीं हो सका. उसका शरीर करीब 50 प्रतिशत जल चुका था. घाव में जलन होती थी. दवा एवं चिकित्सा के अभाव में तडपता था.
तब किसी डॉक्टर ने बता दिया कि उत्तराखंड में हरिद्वार या ऐसे स्थान पर जाने की सलाह दी की तुम उस जगह पर चले जाओ जहां बर्फ पडती हो जिससे जलन नहीं होगी इसलिए वह डर के कारण घर तो नहीं गया लेकिन हरिद्वार पहुंच गया.
तीन महीने पहले जली हुई अवस्था में एम्बुलेंस ने रेस्क्यू किया
तीन महीने पहले अपना घर शुक्रताल की एम्बुलेंस असहाय, लाचार लोगो का रेस्क्यू करते हुए घूम रही थी. तभी जली हुई अवस्था में एक व्यक्ति गंगा के किनारे घूमता नजर आया जिसके शरीर में बडे-बडे घाव हो रहे थे. तब उसे रेस्क्यू किया गया और स्थिति गंभीर होने के कारण उपचार हेतु अपना घर भरतपुर में भर्ती कराया. तभी से राकेश का उपचार चल रहा था. स्वस्थ होने पर काउसलिंग करने पर उसने अपने घर का पता गांव मुमरेजपुर, जिला बुलंदशहर,उत्तर प्रदेश का होना बताया.
उसके बताऐ गये पते पर पुनर्वास टीम द्वारा सम्पर्क किया और बड़े भाई मुनेश कुमार को सूचना दी तो इनके भाई मुनेश और बबलू अपने घर आश्रम भरतपुर आये आश्रम की ओर से राकेश के भाइयों से उचित पहचान पत्र प्राप्त कर मुमरेजपुर, बुलंदशहर चले गये. अपने बिछड़े भाई को देख दोनों फौजी भाई लिपटकर रो पड़े क्योंकि जिस भाई को वह मृत मान चुके थे वह जीवित मिल गया.
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