Rajasthan Election: कांग्रेस के तीन सहप्रभारियों को बांटा गया जिलों का प्रभार, जानिए किसे मिली कहां की जिम्मेदारी
Rajasthan Assembly Election: राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने देर शाम लिस्ट जारी कर दी. तीन सहप्रभारियों अमृता धवन, वीरेंद्र सिंह राठौड़ और मोहम्मद निजामुद्दीन को 11-11 जिले मिले हैं.

Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने कमर कस ली है. हाल ही में नियुक्त किए गए तीन सहप्रभारियों के कामकाज का बंटवारा हो गया. अमृता धवन, वीरेंद्र सिंह राठौड़ और मोहम्मद निजामुद्दीन को 11-11 जिले मिले हैं. राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने देर शाम लिस्ट जारी कर दी. कांग्रेस की सहप्रभारी अमृता धवन को जयपुर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, दौसा, सवाई माधोपुर, सीकर, टोंक, बूंदी और कोटा की जिम्मेदारी दी गई है.
तीन सहप्रभारियों के कामकाज का बंटवारा
पूर्वी राजस्थान में पिछली बार कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया था. टोंक से सचिन पायलट विधायक हैं. दौसा भी सचिन पायलट का गढ़ माना जाता है. श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, झुंझंनू, चूरू, नागौर, अजमेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और पाली की जिम्मेदारी वीरेंद्र सिंह राठौड़ के खाते में आई है. जोधपुर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आते हैं. नागौर में कांग्रेस को बड़ी चुनौती सांसद हनुमान बेनीवाल दे रहे हैं. वीरेंद्र सिंह राठौड़ के लिए नागौर में कांग्रेस की स्थिति मजबूत करने की चुनौती है.
सह प्रभारियों के कामों का बंटवारा
— Santosh kumar Pandey (@PandeyKumar313) April 30, 2023
राजस्थान कांग्रेस के सह प्रभारियों को मिल गए जिले ! सभी को 11-11 जिलों की जिम्मेदारी। @AmritaDhawan1 @INCRajasthan pic.twitter.com/KkzZ9bnP1V
जानिए किसे मिली कहां की जिम्मेदारी?
नवनियुक्त सहप्रभारी काजी मोहम्मद निजामुद्दीन बांसवाड़ा, डूंगरपुर, जालौर, प्रतापगढ़, सिरोही, बांरा, भीलवाड़ा, चितौड़गढ़, झालावाड़, राजसमंद और उदयपुर का प्रभार संभालेंगे. ये जिले बीजेपी और कांग्रेस के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. ऐसे में इन जिलों में काजी के राह चुनौतीपूर्ण दिख रही है. गौरतलब है कि कांग्रेस ने राजस्थान के लिए हाल ही में तीन सहप्रभारियों की नियुक्ति की थी.
विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी तेजी से काम करती हुई दिख रही है. सीएम गहलोत और सचिन पायलट की आपसी खींचतान के बीच संतुलन बनाना तीनों नवनयुक्त सहप्रभारियों को टेढ़ी खीर साबित होगा. कुर्सी के लिए दोनों में शह और मात का खेल चल रहा है.
Source: IOCL


























