इस्तीफे के बाद अयोध्या GST डिप्टी कमिश्नर को मनाने के प्रयास, कई घंटों से जुटे अधिकारी
Shankaracharya Avimukteshwaranand Controversy: शंकराचार्य विवाद के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देने वाले जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह को मनाने के प्रयास जारी हैं.

अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर ने सीएम योगी के समर्थन में अपना इस्तीफा सौंप दिया है. अब जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे के मामले में नया मोड़ आ गया है. इस बीच प्रशांत कुमार सिंह को मनाने के प्रयास किए जा रहे हैं.
इसके लिए जिले के वरिष्ठ अधिकारी कोशिश में जुटे हुए हैं. उनके इस्तीफे के बाद उन्हें मनाने का क्रम शुरू हुआ. प्रशांत कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगभग 3 घंटे से बातचीत चल रही है.
इस वजह से दिया उन्होंने इस्तीफा
अयोध्या में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार (27 जनवरी) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इस बीच उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर देश को बांटने की हालिया कोशिशों से उन्हें गहरा दुख हुआ है. जो कथित तौर पर प्रयागराज की पवित्र भूमि से हो रही हैं.
प्रशांत कुमार सिंह ने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से प्रयागराज की पवित्र भूमि से जाति और धर्म के आधार पर देश को बांटने की घिनौनी कोशिशें हो रही हैं. इससे मुझे गहरा दुख हुआ है.’’ उन्होंने कहा कि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारत के संविधान के समर्थन में लिया गया है.
प्रशांत कुमार से इन अधिकारियों की चल रही मुलाकात
प्रशांत कुमार सिंह से सीडीओ कृष्ण कुमार सिंह, एडीएमसी योगानंद पांडे, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार व एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी जीएसटी दफ्तर पहुंचे और मुलाकात की. मंगलवार (27 जनवरी) को डिप्टी कमिश्नर ने अविमुक्तेश्वरानंद के द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी से आहत होकर इस्तीफा दिया.
इस बीच अपने पद से इस्तीफा देने वाले जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह फोन पर पत्नी से बात करते हुए भावुक हो गए. उन्होंने पत्नी को रोते हुए बताया कि मैंने सीएम योगी के समर्थन में इस्तीफा दे दिया.
अविमुक्तेश्वरानंद के आरोपों के बाद दिया इस्तीफा
यह इस्तीफा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के उस आरोप के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मौनी अमावस्या के दौरान उन्हें और उनके शिष्यों को संगम घाट पर पवित्र डुबकी लगाने से रोका गया था.
उन्होंने आगे दावा किया कि घटना के दौरान प्रशासन ने उनके शिष्यों के साथ मारपीट की थी.हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद रथ पर सवार होकर संगम घाट की ओर जा रहे थे, जिसकी इजाजत भारी भीड़ और धार्मिक सभा में भगदड़ के खतरे के कारण नहीं दी गई थी.























