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अब प्लास्टिक की बोतल और पुराने कपड़ों से बन रहीं गाड़ियां, कार कंपनियों ने क्यों लिया ये फैसला?

Car Manufacturing: कई कार कंपनियां इस्तेमाल प्लास्टिक की बोतलों को पिघलाकर उनसे धागा तैयार कर रही हैं. इस धागे से कारों की सीटों के कवर, कारपेट, रूफ लाइनिंग और अन्य इंटीरियर पार्ट्स बनाए जा रहे हैं.

ऑटोमोबाइल कंपनियां अब सिर्फ शानदार और मॉडर्न कारें बनाने पर ही ध्यान नहीं दे रही हैं, बल्कि पर्यावरण को बचाने की दिशा में भी बड़े कदम उठा रही हैं. बढ़ते प्रदूषण और कचरे की समस्या को देखते हुए ऐसी तकनीकों पर काम किया जा रहा है, जिनमें पुराने और बेकार हो चुके सामान को दोबारा इस्तेमाल करके नई कारें बनाई जा रही हैं. आज हालत यह है कि जिन प्लास्टिक बोतलों, पुराने कपड़ों, मछली पकड़ने के फेंके गए जालों और कबाड़ धातुओं को हम बेकार समझकर फेंक देते हैं, वही सामग्री आधुनिक कारों के इंटीरियर और स्ट्रक्चर का हिस्सा बन रही है. 

कई कार कंपनियां इस्तेमाल हो चुकी PET प्लास्टिक की बोतलों को पिघलाकर उनसे धागा तैयार कर रही हैं. इस धागे से कारों की सीटों के कवर, कारपेट, रूफ लाइनिंग और अन्य इंटीरियर पार्ट्स बनाए जा रहे हैं. भारत में भी कई कंपनियां इस तकनीक को अपना रही हैं. महिंद्रा अपनी नई इलेक्ट्रिक कारों में ऐसे रीसाइकल्ड मैटेरियल का उपयोग कर रही है, जबकि कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी अपनी इलेक्ट्रिक और प्रीमियम कारों में प्लास्टिक बोतलों से बने फैब्रिक का इस्तेमाल कर रहे हैं.

मछली पकड़ने के जाल भी बन रहे कारों का हिस्सा

समुद्र में फेंके गए प्लास्टिक कचरे और पुराने मछली पकड़ने के जाल प्रदूषण की बड़ी वजह हैं. अब इन्हें इकट्ठा करके रीसाइकल किया जा रहा है और उनसे नायलॉन फाइबर तैयार किए जा रहे हैं. यही फाइबर कारों की सीटों, फ्लोर मैट और अन्य इंटीरियर हिस्सों में इस्तेमाल हो रहे हैं. इससे समुद्र में फैला प्लास्टिक कचरा कम होता है और कंपनियों को नए कच्चे माल की जरूरत भी कम पड़ती है. कई प्रमुख कार निर्माता इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं और समुद्री कचरे को जरूरी संसाधन में बदल रहे हैं.

रीसाइक्लिंग का उपयोग केवल कार के अंदरूनी हिस्सों तक सीमित नहीं है. अब कार के बाहरी ढांचे और स्ट्रक्चर में भी रीसाइकल किए गए स्टील और एल्यूमिनियम का इस्तेमाल बढ़ रहा है. पुरानी गाड़ियों से निकाले गए धातु के हिस्सों को प्रोसेस करके फिर से उपयोग में लाया जा रहा है. इससे नई धातु निकालने के लिए खनन की जरूरत कम होती है और ऊर्जा की भी बचत होती है. कुछ कंपनियां तो ऐसी तकनीक विकसित कर रही हैं जिससे पुरानी कारों के धातु, प्लास्टिक और कांच को निकालकर लगभग उसी रूप में नई कारों में दोबारा लगाया जा सके.

पुराने कपड़ों का ऐसे हो रहा यूज

पुराने कपड़े और फटी हुई जींस भी अब बेकार नहीं मानी जा रही हैं. इन्हें रीसाइकल करके कारों के डैशबोर्ड, दरवाजों की पैनलिंग, सीटों और अन्य इंटीरियर हिस्सों में इस्तेमाल किया जा रहा है.कई कंपनियां रीसाइकल्ड डेनिम और पॉलिएस्टर से बने कपड़ों का उपयोग कर रही हैं, जिससे कार का केबिन आकर्षक भी दिखता है और पर्यावरण पर बोझ भी कम पड़ता है.यह कदम फैशन और ऑटोमोबाइल उद्योग दोनों के कचरे को कम करने में मदद कर रहा है.

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About the author क़मरजहां

क़मरजहां एबीपी न्यूज़ में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रही हैं और वर्तमान में ऑटोमोबाइल सेक्शन में कार्यरत हैं. इन्हें पत्रकारिता जगत में 5 साल का अनुभव है और पिछले 4 सालों से ABP Live.com का हिस्सा हैं. क़मरजहां नेशनल, टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट, राजनीति, चुनाव और अलग-अलग राज्यों से जुड़े सेक्शन में काम कर चुकी हैं. कौन-सी स्टोरीज ऑडियंस को अच्छे से कनेक्ट कर पाएंगी, इस हुनर से बखूबी वाकिफ हैं. ट्रेंड्स के साथ ही इन्हें SEO की जानकारी भी है. क़मरजहां ने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई Jamia Millia Islamia से पूरी की है. 

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