कोटा में चालू रेल लाइन से फिर चोरी हुए बिजली के तार, 24 दिन में तीसरा हादसा
कोटा रेल मंडल में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए चोरों ने एक बार फिर रेलवे की चालू ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन (ओएचई) को धारदार औजार से काटा. इसके चलते यात्रियों को रातभर परेशानी उठानी पड़ी.

राजस्थान के कोटा रेल मंडल में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए चोरों ने एक बार फिर चालू रेल लाइन से बिजली के तार चोरी कर लिए. इस बार चोरों ने कोटा-रामगंजमंडी रेलखंड पर दाढ़देवी और अलनिया के बीच वारदात को अंजाम दिया. गुरुवार देर रात हुई इस घटना के चलते रेल यातायात करीब ढाई घंटे तक प्रभावित रहा. आधा दर्जन से अधिक ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ा और यात्रियों को रातभर परेशानी उठानी पड़ी. खास बात यह है कि महज 24 दिन के भीतर ओएचई चोरी की यह तीसरी वारदात है.
जानकारी के अनुसार चोरों ने रेलवे की चालू ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन (ओएचई) को निशाना बनाया. घटना के बाद सामने आए फोटो में तार कटे हुए दिखाई दे रहे हैं. तारों को किसी धारदार औजार से काटे जाने की आशंका है. सूचना मिलने पर रेलवे की टावर वैगन मौके पर पहुंची और मरम्मत का काम शुरू किया गया. इस दौरान संबंधित रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही रोकनी पड़ी. करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद यातायात बहाल हो सका.
कटे तारों में उलझा पैंटोग्राफ, ट्रेन का इंजन हुआ क्षतिग्रस्त
वारदात का असर इंदौर-हिसार ट्रेन (20957) पर भी पड़ा. ट्रेन का इंजन कटे हुए बिजली के तारों में उलझ गया, जिससे उसका पैंटोग्राफ टूट गया. इसके चलते ट्रेन को मौके पर ही रोकना पड़ा. मरम्मत और परिचालन व्यवस्था दुरुस्त होने के बाद ट्रेन करीब ढाई घंटे की देरी से रात 12.30 बजे कोटा पहुंची.
इसके अलावा इंदौर-नई दिल्ली इंटरसिटी (12415) करीब ढाई घंटे की देरी से रात 1.30 बजे, बांद्रा-श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा स्वराज एक्सप्रेस (12471) ढाई घंटे की देरी से रात 1.50 बजे और तिरुवनंतपुरम-चंडीगढ़ संपर्क क्रांति (12217) करीब ढाई घंटे की देरी से रात 2.20 बजे कोटा पहुंची. वहीं इंदौर-निजामुद्दीन स्पेशल (09309) लगभग पांच घंटे की देरी से तड़के 3.30 बजे बाद कोटा पहुंची. ट्रेनों के विलंब से चलने के कारण यात्रियों को स्टेशनों और सफर के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
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25 हजार वोल्ट की लाइन, फिर भी बेखौफ वारदात
रेलवे की ओएचई लाइन में करीब 25 हजार वोल्ट का करंट प्रवाहित होता है. ऐसे में चालू लाइन से तार काटना बेहद जोखिमभरा काम है. इसके बावजूद चोरों ने विशेष औजारों और तकनीक का इस्तेमाल कर वारदात को अंजाम दिया. लगातार हो रही घटनाओं ने रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा और रात के समय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कोटा रेल मंडल में ओएचई चोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. इससे पहले रामगंजमंडी-भोपाल नई रेल लाइन पर जुल्मी और झालावाड़ स्टेशनों के बीच 19 और 9 अक्टूबर को चोरी की वारदात सामने आई थी. पहली घटना में करीब 50 मीटर और दूसरी घटना में लगभग 300 मीटर ओएचई तार चोरी होने की जानकारी सामने आई थी.
पहली घटना को आरपीएफ ने चोरी मानने से इनकार कर दिया था, जबकि दूसरी वारदात में तार चोरी होने की बात स्वीकार की गई थी. इस मामले में चार संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की चर्चा भी सामने आई थी, हालांकि आरपीएफ ने इससे इनकार किया था. आरपीएफ ने जल्द खुलासा करने की बात कही थी, लेकिन दूसरी वारदात के करीब 12 दिन बाद भी मामले का खुलासा नहीं हो सका था. अब नई घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की चिंता और बढ़ा दी है.
साढ़े पांच साल में पांचवीं बार निशाने पर आई चालू लाइन
रामगंजमंडी-भोपाल नई रेल लाइन पर ओएचई चोरी का इतिहास भी पुराना है. करीब साढ़े पांच साल में इस रेल लाइन पर चोरी की यह पांचवीं घटना बताई जा रही है. इससे पहले अप्रैल 2021 में झालरापाटन और जूना खेड़ा स्टेशनों के बीच चालू लाइन से करीब 10 लाख रुपए मूल्य के ओएचई तार चोरी हुए थे. उस दौरान भी दो बार वारदात हुई थी. इसके बाद अक्टूबर में दो और अब तीसरी घटना सामने आई है. लगातार हो रही इन वारदातों के बावजूद चोरों तक पहुंचने में जांच एजेंसियों को सफलता नहीं मिलना रेलवे के लिए चुनौती बना हुआ है.






















