राजस्थान: शहीद सुरेंद्र मोगा की बेटी हुईं भावुक, बोलीं- 'मैं अपने पापा का बदला लूंगी, पाकिस्तान को पूरा...'
Martyr Surendra Moga: झुंझुनूं के शहीद सुरेंद्र मोगा की बेटी वर्तिका ने कहा, "पापा की शहादत ने मेरा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है, अब मैं उनकी राह पर चलकर देश के दुश्मनों से बदला लूंगी."

Martyr Surendra Moga: देश के लिए बलिदान देने वालों की कहानियां सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा होती हैं. झुंझुनूं के मंडावा गांव के लाल, एयरफोर्स के सुरेंद्र मोगा (Surendra Moga), उन्हीं अमर शहीदों में एक नाम बन गए हैं. जम्मू-कश्मीर के आर.एस.पुरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी में शनिवार (10 मई) को उन्होंने वीरगति प्राप्त की. लेकिन उनकी 11 वर्षीय बेटी वर्तिका (Vartika) ने जो कहा, उसने पूरे देश की रगों में लहू को खौलने पर मजबूर कर दिया है.
"मुझे मेरे पापा पर गर्व है, मैं अपने पापा का बदला लूंगी." जब वर्तिका ने ये शब्द कहे, तो उसकी आंखों में आंसू नहीं, बल्कि आग थी. ये कोई आम बच्ची नहीं, ये एक शहीद की बेटी है, जो अपने पिता की शहादत को मातम नहीं, मिशन बना चुकी है.
पाकिस्तान का खत्मा करना चाहिए- वर्तिका
शनिवार रात 9 बजे की बात है. सुरेंद्र मोगा ने आखिरी बार अपनी पत्नी सीमा और बेटी से बात की थी. उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी ड्रोन मंडरा रहे हैं लेकिन अभी तक कोई हमला नहीं हुआ है और वे सेफ हैं. पर किसे पता था कि यह उनकी अंतिम बातचीत होगी. अगली सुबह, घर में मातम छा गया. सीमा बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ीं और वर्तिका अपने आंसू रोकते हुए यह कहने लगी — "पाकिस्तान का खत्मा करना चाहिए, नाम भी नहीं आना चाहिए पाकिस्तान का."
चीख पुकार के बीच वर्तिका ने ठान लिया कि वो आगे बदला लेंगी. उन्होंने कहा, "मैं अपने पापा की तरह फौजी बनना चाहती हुं, और मैं अपने पापा का बदला लुंगी."
#WATCH | Jhunjhunu, Rajasthan | Vartika, Daughter of Sergeant Surendra Moga, says, "I am feeling proud that my father got martyred while killing the enemies and protecting the nation... Last time, we talked to him at 9 PM last night and he said that drones are roaming but not… https://t.co/H0EI1xKw4e pic.twitter.com/0mIHuHT8iL
— ANI (@ANI) May 11, 2025
'भारत माता की जय' और 'शहीद सुरेंद्र अमर रहें' से गुंजी गलियां
सुरेंद्र मोगा का पार्थिव शरीर रविवार (11 मई) को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके गांव लाया गया. गांव की गलियां ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद सुरेंद्र अमर रहें’ के नारों से गूंज उठीं. लेकिन सबसे ज्यादा जो दिल को छू गया, वो था वर्तिका का साहस. उसने यह भी कहा कि वह अपने पापा की तरह सैनिक बनेगी और देश के दुश्मनों से बदला लेगी.
आज जब देश पाकिस्तान की नापाक हरकतों से जूझ रहा है, ऐसे में वर्तिका जैसे बच्चों का यह जज्बा देश को मजबूत करता है. एक 11 साल की बच्ची का यह संकल्प बताता है कि शहीद सिर्फ युद्धभूमि पर नहीं, अपने पीछे देशभक्तों की फौज भी छोड़ जाते हैं.
शहीद सुरेंद्र की कहानी एक पिता, एक पति, और एक सच्चे देशभक्त की कहानी है. उनकी शहादत पर सिर्फ झुंझुनूं ही नहीं, पूरा देश गर्व करता है. और अब उनकी बेटी वर्तिका की आंखों में बस एक ही सपना है — अपने पापा का अधूरा मिशन पूरा करना.
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Source: IOCL























