'विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन...', CJP पर गजेंद्र शेखावत का हमला
CJP के आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विपक्ष पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि विपक्ष जनादेश का सम्मान करना सीखे. अराजकता से लोकतंत्र नहीं चलता.

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में चल रहे आंदोलन के बीच विपक्ष की राजनीति पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है और हर राजनीतिक दल को उसका सम्मान करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विरोध के नाम पर व्यवस्था को बाधित करना और जनादेश की अवहेलना करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है. अराजकता से लोकतंत्र नहीं चलता, बल्कि जनता के फैसले को स्वीकार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है.
राहुल गांधी और कांग्रेस पर उठाए सवाल
मंत्री शेखावत ने राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल विरोध करना नहीं है. विपक्ष को जनता के सामने वैकल्पिक नीतियां और समाधान भी रखने चाहिए. हर मुद्दे पर टकराव की स्थिति पैदा करने और केवल विरोध के लिए विरोध करने से न देश का भला होता है और न ही जनता की समस्याओं का समाधान निकलता है.
उन्होंने कहा कि देश की जनता विकास, सुशासन और स्थिरता चाहती है. ऐसे में राजनीतिक दलों को अपनी महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और जनकल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए. लोकतंत्र में विचारों का संघर्ष होना चाहिए, लेकिन राष्ट्रीय हितों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान से समझौता नहीं होना चाहिए.
मंत्री ने धर्म और व्यवस्था की रक्षा का दिया संदेश
केंद्रीय मंत्री ने अपने संदेश में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक 'परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्, धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे' का उल्लेख करते हुए धर्म, मर्यादा और व्यवस्था की रक्षा पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि न्याय, कर्तव्य, लोककल्याण और व्यवस्था की रक्षा भी है.
शेखावत ने भगवान श्रीराम और महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब व्यवस्था और लोककल्याण के मार्ग में बाधाएं आती हैं, तब उनका दृढ़ता से सामना करना जरूरी होता है. धर्म की रक्षा का अर्थ अन्याय और अव्यवस्था के सामने झुकना नहीं, बल्कि मर्यादा और कर्तव्य के साथ उनका प्रतिकार करना है.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक ताकत जनता का विश्वास और उसका जनादेश है. हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है कि वह जनता के फैसले का सम्मान करे और अपनी भूमिका लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर निभाए.
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