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Sirohi News: ऑन ड्यूटी शराब के नशे में कर्मचारी ने स्पीड पोस्ट करने से किया इनकार, व्यवस्था पर उठे सवाल

Sirohi News In Hindi: आबूरोड डाकघर में एक कर्मचारी पर ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में होने और स्पीड पोस्ट करने से इनकार करने का आरोप लगा है. मामले के सामने आने के बाद व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे.

सिरोही जिले में डाक विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है. आबूरोड स्थित डाकघर में एक कर्मचारी के ऑन ड्यूटी शराब के नशे में होने और ग्राहकों से बदसलूकी करने के आरोप लगे हैं. घटना 9 मार्च सोमवार दोपहर करीब 12 बजकर 50 मिनट की बताई जा रही है, जब एक ग्राहक स्पीड पोस्ट करवाने के लिए डाकघर पहुंचा.

ग्राहक का आरोप है कि वहां मौजूद डाक कर्मचारी ने स्पीड पोस्ट करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि “यहां रखकर चले जाओ, जब समय मिलेगा तब कर दूंगा.” ग्राहक के अनुसार कर्मचारी मनोहर लाल उस समय शराब के नशे में था और कार्यालय में ही सोता हुआ मिला. इस घटना के सामने आने के बाद डाक विभाग की कार्यशैली और अनुशासन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं.

ग्राहक का आरोप: नशे में था कर्मचारी

ग्राहक के अनुसार जब वह स्पीड पोस्ट करवाने के लिए आबूरोड डाकघर पहुंचा तो संबंधित कर्मचारी ने न केवल काम करने से मना कर दिया बल्कि अभद्र व्यवहार भी किया. ग्राहक ने आरोप लगाया कि कर्मचारी शराब के नशे में था और ड्यूटी के दौरान सो रहा था. ग्राहक का कहना है कि केंद्र सरकार के कार्यालयों में इस प्रकार की कार्यशैली बेहद चिंताजनक है. इससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और सरकारी सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा है.

अधीक्षक ने दिए जांच के आदेश

मामले को लेकर जब डाक विभाग के अधीक्षक सुमित सैनी से बात की गई तो उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच करवाने की बात कही. अधीक्षक के निर्देश के बाद निरीक्षण डाकपाल (IPO) महेश मीणा मौके पर पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली. बताया जा रहा है कि जांच के दौरान संबंधित कर्मचारी को कार्यालय के अंदर ले जाकर पूछताछ की गई. हालांकि इस मामले में अभी तक किसी प्रकार की आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है.

कार्यालय में महिला कर्मचारी और ग्राहक भी आते हैं

आबूरोड डाकघर में कई महिला कर्मचारी भी कार्यरत हैं और बड़ी संख्या में महिला ग्राहक भी रोजाना सेवाओं के लिए यहां आती हैं. ऐसे में ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों के शराब के नशे में होने के आरोप बेहद गंभीर माने जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार्यालय में इस प्रकार की घटनाएं होती हैं तो इससे कार्यस्थल का वातावरण भी प्रभावित होता है और सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं.

जिम्मेदारी तय करने की उठी मांग

इस पूरे मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस कार्यालय में निरीक्षण डाकपाल महेश मीणा स्वयं पदस्थ हैं, वहां कर्मचारियों के इस प्रकार के आचरण पर पहले अंकुश क्यों नहीं लगाया गया.
स्थानीय लोगों और ग्राहकों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई की जाती तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती. अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इस तरह की कार्यशैली किसकी पनाह में चल रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है.

शिकायत दिल्ली मुख्यालय तक भेजने की तैयारी

ग्राहक ने इस पूरे मामले की शिकायत डाक विभाग के प्रधान मुख्यालय नई दिल्ली तक भेजने की तैयारी भी की है. शिकायत में सिरोही जिले के डाकघरों की कार्यप्रणाली और वहां की वास्तविक स्थिति से विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराने की बात कही जा रही है.

अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच के बाद विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस घटना के बाद डाक विभाग अपने कार्यालयों में अनुशासन और सेवा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या फिर मामला जांच तक ही सीमित रह जाता है.

IPO महेश मीणा की कार्यशैली पर उठते सवाल

जब आबूरोड डाकघर में निरीक्षण डाकपाल (IPO) महेश मीणा स्वयं सेवारत हैं, तो फिर कर्मचारियों के ऑन ड्यूटी शराब पीकर आने जैसी गंभीर स्थिति पर अब तक अंकुश क्यों नहीं लगाया गया?
क्या कार्यालय में अनुशासन बनाए रखना और कर्मचारियों की निगरानी करना IPO की जिम्मेदारी नहीं है? यदि कर्मचारी लंबे समय से शराब के नशे में ड्यूटी पर आ रहे थे, तो इसकी जानकारी जिम्मेदार अधिकारी तक क्यों नहीं पहुंची, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही थी?

क्या यह माना जाए कि कार्यालय में हो रही ऐसी गतिविधियों पर IPO स्तर पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं है? जिस कार्यालय में महिला कर्मचारी और महिला ग्राहक भी बड़ी संख्या में आती हैं, वहां इस तरह की लापरवाही को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया? क्या इस पूरे मामले में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारी ही जिम्मेदार हैं या फिर निगरानी व्यवस्था की कमजोरी भी इसके पीछे कारण है?

जब शिकायत सामने आने के बाद ही कार्रवाई की स्थिति बनती है, तो क्या यह प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता नहीं मानी जाएगी? यदि IPO स्वयं उसी कार्यालय में पदस्थ हैं, तो फिर उन्हें इस प्रकार की गतिविधियों की जानकारी पहले क्यों नहीं हुई?

क्या अब इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए उच्च अधिकारियों द्वारा IPO स्तर पर भी जवाबदेही तय की जाएगी? सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी ही समय रहते सख्ती नहीं दिखाएंगे, तो आखिर डाक विभाग के कार्यालयों में अनुशासन कायम कौन करेगा?

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