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Jaipur News: राजस्थान में RTE योजना फेल, हजारों गरीब बच्चों को नहीं मिला एडमिशन

Jaipur News in Hindi: राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत राजस्थान में हजारों गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन नहीं मिला. लॉटरी में नाम आने के बाद भी दाखिला न मिलने से बच्चे परेशान है.

राइट टू एजुकेशन के तहत गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भी मुफ्त शिक्षा हासिल करने का अधिकार मिला हुआ है. लेकिन राजस्थान में यह कानून फिलहाल मजाक बनकर रह गया है. स्कूलों में मौजूदा शिक्षा सत्र खत्म होने की कगार पर है, लेकिन निर्धारित सीटों के मुकाबले एक तिहाई बच्चों को भी एडमिशन नहीं मिल सका है. यहां हालात इतने खराब है कि जिन बच्चों के नाम लॉटरी में आ गए थे, उनमें से भी आधे से ज्यादा को सेशन खत्म होने तक एडमिशन नहीं मिल सका है.

शिक्षा विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद दाखिला नहीं मिलने से मायूस अभिभावकों को अब इस बात का डर सता रहा है कि नए सेशन में उनके बच्चे का नाम लॉटरी में आएगा भी या नहीं या फिर वह ओवर ऐज तो नहीं हो जाएंगे. राइट टू एजुकेशन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट भी कई दिशा निर्देश जारी कर चुका है, लेकिन सरकार जल्द ही सब कुछ ठीक होने का दावा करते हुए इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं.

पहले राउंड में 80 हजार बच्चों का लॉटरी में आया नाम

राजस्थान में पिछले साल जुलाई महीने से शुरू हुए मौजूदा शिक्षा सत्र में तकरीबन सवा लाख बच्चों को राइट टू एजुकेशन के तहत प्राइवेट स्कूलों में मुफ्त शिक्षा के लिए एडमिशन दिए जाने थे. पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन के बाद फार्म की जांच की गई और इसके बाद लॉटरी निकाली गई. पहले राउंड में तकरीबन अस्सी हजार बच्चों का नाम लॉटरी में आया, लेकिन इनमें से अभी तक सिर्फ छत्तीस हजार बच्चों को ही एडमिशन मिल सका है. पहले राउंड के बाद दोबारा लॉटरी निकालने की नौबत ही नहीं आ सकी.

लॉटरी में सिलेक्ट हुए जिन आधे से ज्यादा बच्चों को अभी तक एडमिशन नहीं मिल सका है, उनके अभिभावक बच्चों को साथ लेकर कभी अधिकारियों तो कभी स्कूल और कभी शिक्षा विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. इन्हीं में लक्ष्य नाम का एक बच्चा भी शामिल है. इसके पिता राजकुमार और मां सिया लक्ष्य को साथ लेकर पिछले कई महीनों से शिक्षा विभाग के दफ्तर, स्कूल और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, आज तक उसे एडमिशन नहीं मिल सका है. लक्ष्य के माता-पिता का कहना है कि नए सेशन के लिए फिर से अप्लाई करना पड़ रहा है, लेकिन मुश्किल यह है कि नए सेशन में लॉटरी में नाम आएगा भी या नहीं. इसी तरह तमाम दूसरे बच्चे भी दाखिला नहीं पा सके और उनका साल खराब हो गया है.

'राइट टू एजुकेशन' को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखा रही सरकार- अभिषेक जैन

इस बारे में अभिभावक संघ के संयोजक अभिषेक जैन बिट्टू का कहना है कि सरकार बिल्कुल भी राइट टू एजुकेशन को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. प्राइवेट स्कूल दाखिला लेना नहीं चाहते और सरकारी अधिकारी उन पर कोई दबाव नहीं बनाते हैं. इसका खामियाजा गरीब बच्चों और उनके परिवार वालों को भुगतना पड़ता है. उनका कहना है कि हाईकोर्ट के निर्देशों और सख्ती के बावजूद अधिकारी कतई गंभीर नहीं दिख रहे हैं.

हालांकि इसे लेकर प्राइवेट स्कूलों की अपनी अलग ही दलील है. जयपुर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष दामोदर गोयल के मुताबिक तमाम तरह की दिक्कतें आती है. अधिकारी और सरकार उन दिक्कतों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते. राइट टू एजुकेशन का मकसद सिर्फ स्कूलों पर शिकंजा कसने से कामयाब नहीं होगा, बल्कि इसके लिए सिस्टम से जुड़े हुए सभी लोगों को साथ मिलकर काम करना होगा.

राजस्थान में राइट टू एजुकेशन को लेकर जमकर सियासत भी हो रही है. विपक्ष इसे लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है. कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि शिक्षा मंत्री सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए जानबूझकर विवादित बयानबाजी करते हैं. उन्हें बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है. ना स्कूलों की बिल्डिंग सुरक्षित करने पर काम किया जा रहा है और ना ही राइट टू एजुकेशन के तहत मुफ्त शिक्षा को लेकर. दूसरी तरफ राजस्थान सरकार इस मुद्दे को लेकर सधा हुआ जवाब दे रही है. राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर इस मुद्दे पर कुछ बोलना नहीं चाहते.

सिर्फ मजाक बनकर रह गई है राइट टू एजुकेशन योजना- मंत्री

सरकार के कैबिनेट मंत्री गौतम दक का कहना है कि सब कुछ ठीक है. कुछ कमी होगी तो उसमें जल्द ही सुधार भी कर लिया जाएगा, लेकिन मौजूदा सेशन खत्म होने के बावजूद जिन बच्चों को एडमिशन नहीं मिला और जिनका एक साल खराब हुआ. उनसे जुड़े सवाल पूछने पर वह भी बचते हुए नजर आए. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि गरीब बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी राइट टू एजुकेशन योजना सिस्टम की लापरवाही और आपसी खींचतान के चलते मजाक सी बनकर रह गई है. इस बारे में हर कोई पल्ला झाड़ कर बचना चाह रहा है. सीधे तौर पर जिम्मेदारी और जवाबदेही लेने को कोई भी तैयार नहीं है. इस खींचतान का खामियाजा हजारों गरीब बच्चों को भुगतना पड़ रहा है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है.

हाईकोर्ट ने राइट टू एजुकेशन के तहत दाखिले को लेकर अब नया नियम बना दिया है. अदालत ने कहा है कि पहली कक्षा के साथ ही नर्सरी समेत नीचे की अन्य क्लास में भी एडमिशन लेना होगा. ऐसे में इस बार तकरीबन दो लाख सबसे ज्यादा बच्चों को दाखिला मिल सकता है, लेकिन क्या ऐसा हो सकेगा फिलहाल यह सवाल ही है.

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मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट - इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति - धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं. 

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