'दक्षिण में हुए आंदोलन की स्थिति वापस ना बने...', महिला आरक्षण विधेयक को लेकर बोले अशोक गहलोत
Women’s Reservation Bill in India: केंद्र सरकार के नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करने के लिए सदन में तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाए जाने पर राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने रोष प्रकट किया है.

केंद्र सरकार ने सदन में तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करने जा रही है. इसके माध्यम से महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण की बात कही जाएगी. आपको बता दें कि साल 2023 में जब यह अधिनियम आया था, तब 2027 की जनगणना के अनुसार आरक्षण और परिसीमन के अनुसार इसे लागू होना था.
मगर अब सरकार विशेष सत्र के माध्यम से संशोधन कर साल 2011 की जनसंख्या को आधार मानकर आरक्षण और परिसीमन लागू करने जा रही है, जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतिक्रिया सामने आई है.
'साउथ के लोग बिगाड़ सकते हैं हमारी स्थिति'
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने जो गुस्सा प्रकट किया, रोष प्रकट किया है, आशंकाएं जताई हैं. उसमें मेरा मानना है कि मोदी जी को साउथ की चिंताओं को बहुत 'गंभीरता से लेना चाहिए' और यह मैं बार-बार रिपीट कर रहा हूं. क्योंकि साउथ के लोगों को अगर यह फील हो गया कि नॉर्थ वाले हमारे ऊपर अनावश्यक थोप रहे हैं और हमारी स्थिति कमजोर कर रहे हैं तो स्थिति बिगड़ सकती है.
'दक्षिण में हुए आंदोलन की स्थिति वापस ना बने'
साल 1950-60 के वक्त में दक्षिण में जो आंदोलन हुए थे, वो स्थिति वापस नहीं बन जाए. इससे ही अंदाजा लगा लीजिए कि उनके दिलों में आग लगी हुई है. इसलिए यह बहुत सेंसिटिव मामला है. पक्ष-विपक्ष सब चाहते हैं, महिलाओं को आरक्षण मिले, पर ये जो परिसीमन का तरीका अपना रहे हैं वो सही नहीं है. वहीं सेंसस 2021 में हो जाना चाहिए था, पर यह क्यों नहीं कर पाए? अब जो सेंसस करने के कमिश्नर हैं, वो कह रहे हैं एक साल के अंदर साल 2027 तक सेंसस कर सकते हैं. फिर भी नहीं कर रहे. वहीं तमिलनाडु और बंगाल में चुनाव चल रहे हैं, उसके बीच में आपने पार्लियामेंट क्यों बुलाया है?
गहलोत ने कहा कि खड़गे साहब ने भी कहा है कि आप चुनाव समाप्त हो जाए, तब पार्लियामेंट बुलाओ, क्योंकि सब लोग चुनाव के अंदर व्यस्त होंगे. तब भी आप जल्दबाजी कर रहे हो. इसका मतलब आपके दिल में कई तरह की खोट है या कोई षड्यंत्र है कि आप महिला आरक्षण के नाम पर विपक्षी पार्टियां को बदनाम करना चाहते हैं. इसलिए यह जो चाल चल रहे हैं, उसे लोकतंत्र में उचित नहीं कहा जा सकता.
'3 साल पहले ही कानून लागू करने को कहा था'
गहलोत ने आगे कहा कि 2011 को आधार बनाने का अचानक फॉर्मूला क्यों सामने आ गया? उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि 3 साल पहले जब संसद में कानून बना था, तब खड़गे साहब ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इसे 2024 से ही तुरंत लागू किया जाए. उस समय सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया था कि 2021 की जनगणना अभी बाकी है और पहले उसे पूरा किया जाएगा, उसके बाद उसी के आधार पर कानून लागू किया जाएगा.
लेकिन अब सरकार यह कह रही है कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन कर दिया जाएगा, जो उचित नहीं कहा जा सकता. गहलोत ने दोहराया कि पहले 2021 की जनगणना का इंतजार करने की बात कही गई थी, लेकिन अब अचानक 2011 के आंकड़ों को आधार बनाना सवाल खड़े करता है और इससे सरकार की मंशा पर भी संदेह होता है.
Source: IOCL



























