भीलवाड़ा: शिक्षक के तबादले के विरोध में छात्रों का अनोखा आंदोलन, तीन दिन से धरने पर बैठे
Bhilwara News: नंदराय के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक शंकरलाल जाट के तबादले के विरोध में छात्र तीन दिन से धरने पर बैठे हैं. कड़ाके की ठंड में रातभर डटे रहे. स्कूल पर ताला गांव का बाजार बंद

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बीगोद क्षेत्र में स्थित नंदराय गांव इन दिनों गुरु-शिष्य परंपरा, भावनात्मक जुड़ाव और सामूहिक सद्भाव का जीवंत उदाहरण बन गया है. यहां एक शिक्षक के तबादले के विरोध में छात्र-छात्राओं ने जो कदम उठाया है, उसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
नंदराय स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक शंकरलाल जाट के स्थानांतरण के विरोध में विद्यालय के विद्यार्थी बीते तीन दिनों से दिन-रात धरने पर बैठे हैं. यह आंदोलन सोमवार से शुरू हुआ था, जो बुधवार तक भी थमता नजर नहीं आया. विद्यार्थियों की एक ही मांग है—तबादला तुरंत रद्द किया जाए.
गुरु भक्ति की मिसाल
इस आंदोलन की सबसे मार्मिक तस्वीर तब सामने आई, जब विद्यार्थियों ने ऐलान किया कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वे सामूहिक रूप से स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC) कटवाने के लिए आवेदन कर देंगे. बच्चों के हाथों में TC की अर्जियां और आंखों में अपने शिक्षक के प्रति सम्मान—यह दृश्य हर किसी को भावुक कर देने वाला है.
बुधवार को आंदोलन और तेज हो गया. ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. कड़ाके की ठंड के बावजूद बच्चे, अभिभावक और ग्रामीण रातभर स्कूल परिसर के बाहर डटे रहे. आंदोलन के समर्थन में ग्रामीणों ने नंदराय गांव का बाजार भी पूरी तरह बंद करवा दिया, जिससे पूरे इलाके में गंभीर और संवेदनशील माहौल बन गया.
सड़क पर पंगत, संघर्ष में एकता
धरने पर बैठे बच्चों के लिए ग्रामीणों द्वारा स्कूल के बाहर ही भोजन तैयार किया गया. विद्यार्थियों ने सड़क पर पंगत लगाकर भोजन किया, जो इस आंदोलन में सामूहिकता, त्याग और एकजुटता का प्रतीक बन गया. विद्यालय की छात्रा यामिनी कुमारी तेली ने भावुक शब्दों में कहा, "हम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नंदराय में पढ़ते हैं. हमारे सर का ट्रांसफर रद्द करवाने के लिए हम दो दिन से धरने पर बैठे हैं. आज तीसरा दिन है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. अगर आज भी कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो हम स्कूल में TC की एप्लीकेशन जमा करवाकर अपनी TC कटवा लेंगे."
प्रशासन के सामने चुनौती
यह आंदोलन अब केवल एक तबादले का विरोध नहीं, बल्कि शिक्षक-विद्यार्थी संबंधों की गहराई और ग्रामीण समाज की एकजुटता का प्रतीक बन चुका है. अब देखना यह है कि प्रशासन इस भावनात्मक आंदोलन पर क्या रुख अपनाता है और क्या विद्यार्थियों की यह गुरु भक्ति रंग लाती है या नहीं.
यह घटना शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका और छात्रों पर उनके प्रभाव को रेखांकित करती है. ऐसे समय में जब शिक्षक-छात्र संबंध कमजोर होते जा रहे हैं, नंदराय के छात्रों का यह आंदोलन एक मिसाल है.
Source: IOCL
























