राजस्थान विधानसभा बनी अखाड़ा! पक्ष-विपक्ष हुआ आमने सामने, हंगामे के बीच दो बिल पारित
Rajasthan Assembly News: राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दौरान जोरदार हंगामा हुआ. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और धक्का-मुक्की के बीच दो विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिए गए.

राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार (5 मार्च) को उस समय पूरी तरह गरमा गया जब सदन में दो महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए. बहस इतनी तीखी हो गई कि देखते ही देखते सदन का माहौल हंगामे में बदल गया. नारेबाजी, वेल में पहुंचकर विरोध और विधायकों के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति के बावजूद सरकार ने ‘राजस्थान जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026’ और ‘राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (संशोधन) विधेयक’ को ध्वनिमत से पारित करा लिया.
तीखी बहस से बढ़ा विवाद
विधेयकों पर चर्चा के दौरान माहौल तब ज्यादा बिगड़ गया जब सभापति संदीप शर्मा और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच तीखी नोकझोंक हो गई.
डोटासरा ने आरोप लगाया कि विपक्ष के विधायकों को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है. इस बात को लेकर कांग्रेस के कई विधायक नाराज हो गए और विरोध जताते हुए सदन के बीचों-बीच यानी वेल में पहुंच गए.
इसके बाद सत्ता पक्ष के विधायक भी अपनी सीटों से उठकर सामने आ गए और दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी शुरू हो गई. कुछ देर के लिए ऐसा माहौल बन गया जैसे सदन किसी राजनीतिक अखाड़े में बदल गया हो.
हंगामे के बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और कांग्रेस विधायक हाकम अली के बीच तीखी बहस हो गई. दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों आमने-सामने आ गए और उनके बीच मुश्किल से एक फुट की दूरी रह गई. कुछ समय के लिए सदन में हाथापाई जैसी स्थिति बन गई, हालांकि अन्य विधायकों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया.
आसन ने जताई नाराजगी
लगातार बढ़ते हंगामे से नाराज सभापति ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सदन में इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है और आप लोग दादागिरी कर रहे हैं. वहीं सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि विधानसभा को “नाथी का बाड़ा” न समझें.
लगातार हंगामे के कारण आखिरकार सदन की कार्यवाही को करीब आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा. बाद में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग देखने के बाद उचित कार्रवाई करने का भरोसा दिया.
दुकान और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान कानून में बड़े बदलाव
सरकार द्वारा पारित राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (संशोधन) विधेयक के जरिए 1958 के पुराने कानून में कई अहम बदलाव किए गए हैं. इन बदलावों का सीधा असर व्यापारियों और कर्मचारियों दोनों पर पड़ेगा.
नए प्रावधानों के अनुसार काम करने की न्यूनतम आयु 12 साल से बढ़ाकर 14 साल कर दी गई है. साथ ही 14 से 18 साल के किशोरों के लिए रात में काम करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा.
इसके अलावा काम के घंटों में भी बदलाव किया गया है. अब किसी कर्मचारी से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे तक काम लिया जा सकेगा, जबकि पहले यह सीमा 9 घंटे थी.
ओवरटाइम की सीमा भी एक तिमाही में 50 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई है, जिससे व्यापारियों को सीजनल काम के दौरान राहत मिलेगी. नए नियमों के मुताबिक हर 6 घंटे के काम के बाद कर्मचारियों को आधे घंटे का ब्रेक देना भी अनिवार्य होगा.
जन विश्वास विधेयक से छोटे मामलों में राहत
सरकार ने राजस्थान जन विश्वास (संशोधन) विधेयक के जरिए राज्य के 11 अलग-अलग कानूनों में बदलाव किया है. इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना और अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम करना बताया जा रहा है.
इस विधेयक के तहत तकनीकी गलतियों या छोटे उल्लंघनों को अब आपराधिक अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा. उदाहरण के तौर पर रिकॉर्ड समय पर जमा न करने जैसी चूक के मामलों में अब जेल की सजा नहीं होगी.
वन अधिनियम और उद्योग सहायता जैसे कुछ कानूनों में जेल के प्रावधान को हटाकर केवल आर्थिक दंड यानी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है. सरकार का कहना है कि इससे व्यापारियों को अनावश्यक मुकदमों और तथाकथित ‘इंस्पेक्टर राज’ से राहत मिलेगी.
Source: IOCL

























