अरावली: जयपुर की हरियाली से लेकर पत्थरों के ढेर तक का सफर, ABP Live की ग्राउंड रिपोर्ट
Aravalli Hills: केंद्र सरकार द्वारा अरावली के नियमों में बदलाव के बाद ABP News की टीम जयपुर पहुंची. ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि हरी-भरी पहाड़ियां अब सिर्फ पत्थर रह गई हैं.

केंद्र सरकार द्वारा अरावली के नियमों में बदलाव और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद देशभर में विरोध तेज हो गया है. इसी मुद्दे की हकीकत जानने ABP News की टीम राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंची, जहां की तस्वीर चौंकाने वाली है. जयपुर, जिसे पिंक सिटी और ग्रीन सिटी कहा जाता है.
करीब 300 साल पहले अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसाया गया था. उस समय पहाड़ से लेकर पूरा शहर हरा-भरा और बेहद खूबसूरत था. आजादी के बाद इन पहाड़ियों को वन क्षेत्र और संपदा मानते हुए इनके संरक्षण के लिए कानून बनाया गया. लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.
हरियाली की जगह अब सिर्फ पत्थर
जयपुर शहर की पहाड़ियों से हरियाली अब लगभग गायब हो चुकी है. जो पहाड़ कभी हरे-भरे और मनमोहक थे, आज वे सिर्फ चट्टान और पत्थर के रूप में दिखाई देते हैं. जो पहाड़ियां कभी दिल को सुकून देती थीं, आज वे वीरान और बेजान नजर आती हैं. अरावली के नियमों में बदलाव का विरोध करने वालों को इसी बात का डर है.
लोगों का मानना है कि जब अवैध खनन से ही इन पहाड़ियों का यह हाल हो गया है, तो संरक्षित क्षेत्र से बाहर होने के बाद यहां वैध और अवैध दोनों तरह का खनन शुरू हो जाएगा. जिन पहाड़ियों को लाइफलाइन कहा जाता है, वे मुसीबत का कारण बन जाएंगी.
ग्राउंड रिपोर्ट: मालवीय नगर से बड़ी चौपड़ तक
पहाड़ियों का रियलिटी चेक करने के लिए ABP News की टीम पहले शहर के नए बसे इलाके मालवीय नगर के इंडस्ट्रियल एरिया पहुंची. यहां एक ऊंची बिल्डिंग से पहाड़ियों की जो तस्वीर दिखी, वह हैरान करने वाली थी. दूर-दूर तक हरी-भरी पहाड़ियों की जगह सिर्फ चट्टानें नजर आ रही थीं. पहाड़ी पर इक्का-दुक्का पेड़ ही दिखे.
ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि यह अरावली की पहाड़ियों का हिस्सा है. वहीं शहर के बाहरी इलाकों की पहाड़ियां अभी भी पहले की तरह हरी-भरी और खूबसूरत हैं. यह कहानी सिर्फ मालवीय नगर की नहीं है, बल्कि जयपुर के शहरी इलाके में ज्यादातर जगहों का यही हाल है.
जयपुर के पुराने इलाके बड़ी चौपड़ में नाहरगढ़ किले के नीचे की पहाड़ियों की तस्वीर भी लगभग वैसी ही है. यहां भी पहाड़ियों का बड़ा हिस्सा चट्टान और पत्थर के रूप में दिखाई दे रहा है.
50 साल में बदल गई तस्वीर
इन इलाकों में कई ऐसे लोग मिले जो पिछले 50 सालों का फर्क बता रहे हैं. उनके मुताबिक, जब वे छोटे थे तो ये पहाड़ियां जंगल जैसी दिखती थीं. इन पर इतने पेड़-पौधे होते थे कि चारों तरफ हरियाली ही हरियाली थी. मौसम भी काफी अलग था.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन पहाड़ियों पर चोरी-छिपे खनन करके इन्हें बर्बाद कर दिया गया है. उनका कहना है कि जो कुछ बचा है, उसे संभालकर रखने की जरूरत है. मौसम के मिजाज से लेकर पर्यावरण और प्रदूषण - सभी में इसकी वजह से काफी बदलाव आया है.
आस्था और विरासत भी खतरे में
जयपुर शहर की इन पहाड़ियों पर कई मंदिर और किले भी हैं. अगर नियमों में बदलाव के बाद खनन होता है तो न सिर्फ इन पहाड़ियों का अस्तित्व खत्म होगा, बल्कि लोगों की आस्था भी प्रभावित होगी. कई मंदिर खत्म हो सकते हैं और साथ ही इतिहास और विरासत को दर्शाने वाले किलों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा.
लोगों का कहना है कि अगर अरावली के नियमों में बदलाव कर छेड़छाड़ की गई तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना होगा. जयपुर की मौजूदा तस्वीर इसी बात की गवाही दे रही है.
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Source: IOCL






















