Lok Sabha Elections 2024: रैलियों की समीक्षा रिपोर्ट से तय होगा BJP सांसदों-विधायकों का भविष्य, नए चेहरों को मिल सकता है मौका
Lok Sabha Elections: जून महीने में हरियाणा के लोकसभा क्षेत्रों में हुई रैलियों पर ही सांसदों विधायकों का भविष्य टिका हुआ है. इन रैलियों में परफॉर्मेंस के आधार पर ही उन्हें टिकट दी जाएगी.

Haryana News: लोकसभा चुनावों को लेकर हरियाणा में बीजेपी एक्टिव मोड में नजर आ रही है. जून माह में लोकसभा क्षेत्रों में हुई रैलियों से अब सांसदो का लेखा-जोखा तैयार होगा. ये रैलियां ही बीजेपी के सांसदों का भविष्य तय करने वाली है. बीजेपी के तरफ से लोकसभा स्तर की सभी रैलियों की समीक्षा करने का फैसला लिया गया है. इस समीक्षा के दौरान ही लोकसभा और विधानसभा वाइज नेताओं की परफॉर्मेंस तैयार की जाएगी.
‘किस नेता का कितना जनाधार’
जून माह में हुई रैलियों में किस 10 लोकसभा सीटों और 90 विधानसभा सीटों पर किस नेता ने रैली के लिए कितना प्रयास किया, उस नेता का उसके क्षेत्र में कितना जनाधार है इन सभी विषयों पर एक रिपोर्ट तैयारी की जाएगी, जिसपर समीक्षा बैठक में मंथन किया जाएगा. इस समीक्षा के बाद लोकसभा वाइज रिपोर्ट बनाकर हाईकमान के पास भेजी जाएगी. इसके लिए 4 या 5 जुलाई को बीजेपी की बैठक हो सकती है. इस बैठक में सभी जिलों के अध्यक्ष प्रभारी और प्रदेश महामंत्री शिरकत करने वाले है.
हर हल्के पर करना होगा फोकस
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ पहले भी कह चुके है कि पार्टी हर हल्के पर अपना फोकस करके चलने वाली है. बीजेपी दसों लोकसभा सीटों और 90 विधानसभा में से एक भी सीट हारना नहीं चाहती. बीजेपी के प्रदेश महामंत्री चौधरी वेदपाल के अनुसार रैलियों की समीक्षा के लिए बैठक की तारीखों का ऐलान जल्द किया जाएगा. सांसदों-विधायकों की रिपोर्ट हाईकमान के पास भेजने के बाद पार्टी के संगठन से जुड़े नेताओं के साथ बैठक की जाएगी. फिर इसी आधार पर पार्टी की अगली रणनीति तैयार की जाएगी.
इसी आधार पर होगा टिकटों का वितरण
बीजेपी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. इसके लिए जो सांसदों-विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा उसी आधार पर फिर पार्टी तय करेगी कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उन्हें टिकट देना है कि नहीं.
नए चेहरों पर भी रहेगा फोकस
जिन लोकसभा क्षेत्रों की रैलियों में सांसदों और विधायकों की सक्रियता कम रही है. ऐसे चेहरों से पार्टी किनारा कर सकती है और उनकी जगह नए चेहरों पर फोकस किया जाएगा. यहीं नहीं जिन क्षेत्रों में बीजेपी के विधायक नहीं थे उन क्षेत्रों में रैली के लिए पूर्व नेताओं को कमान सौंपी गई थी. ऐसे नेताओं की भूमिका की भी एक रिपोर्ट तैयारी की जाएगी.
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