'PM मोदी ने बहुत बड़ा तीर मार लिया...', पेपर लीक बिल पर बोले संजय राउत
Public Examinations Amendment Bill: संसद में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पेश किया गया. इस पर विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए हैं.

देश की संसद में सोमवार (28 जुलाई) पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पेश किया गया. इसको लेकर पक्ष-विपक्ष की ओर से प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है. इस बीच शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत की प्रतिक्रिया सामने आई है.
संजय राउत ने कहा, "एंटी पेपर लीक पर चर्चा तो होगी, लेकिन भारत में विश्व का सबसे बड़ा आंदोलन जंतर-मंतर पर हुआ है. अब नया बिल आया है. मोदीजी को लगता है बहुत बड़ा तीर मार लिया, लेकिन यह पुराना ही बिल है. इसमें सिर्फ सजा का प्रावधान 1 साल से 10 साल किया और 1 करोड़ का जुर्माना था जिसे 10 करोड़ कर दिया गया.
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संजय राउत ने किया बड़ा दावा
यूबीटी सांसद संजय राउत ने बड़ा दावा करते हुए कहा, "पेपर लीक का सबसे बड़ा रैकेट भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में चल रहा है. महाराष्ट्र से नीट पेपर लीक में जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है वे सभी बीजेपी से संबंधित लोग हैं. "
उन्होंने आगे कहा, "वाइस चांसलर को आप नियुक्त करते हो, ये बड़े-बड़े एजुकेशन बोर्ड हैं वहां आपके लोग बैठते हैं." उन्होंने आगे कहा, "वे सब मिल-जुलकर ये काम करते हैं और करते रहेंगे. ये बिल लाने से कुछ नहीं होगा."
#WATCH दिल्ली: शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर कहा, "विश्व का सबसे बड़ा आंदोलन जंतर-मंतर पर हुआ है। अब नया बिल आया है लेकिन यह पुराना ही बिल है। इसमें सजा का प्रावधान 1 साल से 10 साल हुआ है और 1 करोड़ का… pic.twitter.com/vB3Qk1Uxk5
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 28, 2026
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पेश किया बिल
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक विरोधी बिल पेश किया. यह कदम नीट पेपर लीक के खिलाफ कई सप्ताह तक चले देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है.शून्यकाल के दौरान सदन में जारी विपक्ष सदस्यों के हंगामे के बीच मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 पेश किया.
इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने सदन की मेज थपथपाते हुए अपना समर्थन दिया. इसके बाद लोकसभा स्पीकर ने विधेयक पर संशोधन प्रस्तुत करने के लिए दोपहर एक बजे तक का समय निर्धारित किया. प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाना है.
इस बिल कितनी सजा का प्रावधान है?
इसके तहत दोषियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. इनमें 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपए तक का जुर्माना, दोषियों की संपत्ति जब्त करना और मामलों का फैसला तीन महीने के भीतर सुनिश्चित करने की व्यवस्था शामिल है.
यह कदम केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा शुक्रवार को उस विधेयक और संबंधित प्रावधानों को मंजूरी देने के बाद उठाया गया है, जिनका उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करना और कड़ी सजा सुनिश्चित करना है.
























