राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में संजय राउत की एंट्री, बोले- 'एक करोड़ रुपये और चांदी की ईंट दान की थी, कहां गई?'
Ram Mandir Donation Theft: इस बीच राम मंदिर में लोगों द्वारा दान किए गए सोने-चांदी के आभूषणों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने भी बड़ा सवाल खड़ा किया है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के मामले पर सियासत तेज हो गई है. इस बीच राम मंदिर में लोगों द्वारा दान किए गए सोने-चांदी के आभूषणों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने भी बड़ा सवाल खड़ा किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए शिवसेना द्वारा दान की गई 4 किलो चांदी की ईंट के गायब होने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं."
संजय राउत ने आगे लिखा, "उद्धव ठाकरे ने हजारों शिवसैनिकों और संतों की मौजूदगी में खुले मन से 1 करोड़ रुपये और पवित्र चांदी की ईंट दान की थी. फिर भी सालों बाद भी ट्रस्ट से कोई रसीद या अपडेट नहीं मिला है. यह ईंट कहां गई? अब पूरी जांच और जवाबदेही का समय आ गया है."
“Serious questions over the missing 4 kg silver brick donated by Shiv Sena for the Ram Mandir construction in Ayodhya.
— Sanjay Raut (@rautsanjay61) June 26, 2026
Uddhav Thackeray ji had generously contributed ₹1 crore + this sacred silver brick in the presence of thousands of Shiv Sainiks & saints. Yet, years later, no… pic.twitter.com/fy1HoTTg3n
राम मंदिर चढ़ावा चोरी में 8 के खिलाफ एफआईआर
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से गुरुवार को आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस ने बताया कि एसआईटी की ओर से दो दिन पहले सरकार को सौंपी गई शुरुआती रिपोर्ट में कठोर सिफारिश की गई हैं. फिलहाल आरोपी पुलिस कस्टडी में हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है.
पुलिस सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की तहरीर पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया.
सीएम योगी के निर्देश पर बनाई गई एसआईटी
अयोध्या के राम में कथित दान और चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने विशेष जांच का अनुरोध किया था जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ था.
राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि एसआईटी की निष्पक्ष जांच से 'दूध का दूध और पानी का पानी' होकर रहेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

























