BMC चुनाव में छोटी पार्टियों ने बिगाड़ा बड़े दलों का गणित, इन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला
Maharashtra News: बीएमसी चुनाव में छोटी पार्टियां अहम भूमिका निभा सकती हैं. कम वोटों में जीत-हार तय होने से ये दल बड़े और सेक्युलर गठबंधनों का गणित बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं.

मुंबई में होने वाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और उलझे हुए नजर आ रहे हैं. चुनाव मैदान में जहां तीन बड़े राजनीतिक गठबंधन अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, वहीं कई छोटी पार्टियां भी मुकाबले को रोमांचक बना रही हैं. खास बात यह है कि बीएमसी चुनावों में कई सीटों पर जीत-हार का अंतर बहुत कम रहता है और ऐसे में छोटी पार्टियां बड़े दलों, खासकर सेक्युलर दलों का गणित बिगाड़ सकती हैं.
मुंबई महानगरपालिका पर कब्जा जमाने के लिए एक ओर शिवसेना (यूबीटी), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) का गठबंधन मैदान में है. दूसरी ओर बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) का गठबंधन सीधी टक्कर दे रहा है. वहीं कांग्रेस इस बार महाविकास आघाड़ी से अलग होकर प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ चुनाव लड़ रही है. इस तरह मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.
कौनसा दल कितने सीटों पर लड़ रहा चुनाव
इन बड़े गठबंधनों के अलावा समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, एआईएमआईएम, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) और अजीत पवार की राकांपा भी अपने-अपने चुनाव चिन्ह पर मैदान में हैं. समाजवादी पार्टी ने 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि अजीत पवार गुट की राकांपा करीब 100 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. आरपीआई (आठवले) ने 39 और आम आदमी पार्टी ने 75 उम्मीदवारों की घोषणा की है.
अखिलेश यादव की PDA नीति का किया पालन- अबू आजमी
हालांकि मुंबई में ये दल छोटे नजर आते हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी को छोड़कर बाकी दल पहले भी अपनी ताकत दिखा चुके हैं. समाजवादी पार्टी 1997 में बीएमसी में 22 सीटें जीत चुकी है और उसी आधार पर विधान परिषद में भी प्रतिनिधित्व हासिल कर चुकी है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी का कहना है कि इस बार टिकट वितरण में अखिलेश यादव की पीडीए नीति का पालन किया गया है, जिससे पार्टी को फायदा मिलने की उम्मीद है. सपा ने भिवंडी में भी 60 उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) को नुकसान हो सकता है.
उधर, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले द्वारा 39 उम्मीदवार उतारने को भी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी को ज्यादा नुकसान होगा, जबकि बीजेपी-शिवसेना गठबंधन पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा. वहीं अजीत पवार गुट के नेता नवाब मलिक का मुंबई में अच्छा जनाधार भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है.
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Source: IOCL






















