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महाराष्ट्र: तेंदुए वाला कॉस्ट्यूम पहनकर विधानसभा में पहुंचे विधायक, सरकार से कर दी बड़ी मांग

Maharashtra News: जुन्नर से विधायक शरद सोनवणे ने कहा कि उनका यह पहनावा लोगों के दैनिक जीवन में व्याप्त डर का प्रतीक है.

महाराष्ट्र में बुधवार (10 दिसंबर) को सभी की नजरें जुन्नर के विधायक पर टिक गईं. जुन्नर के विधायक शरद सोनवणे तेंदुए का ड्रेस पहनकर विधानसभा पहुंच गए. उन्होंने सरकार का ध्यान तेंदुओं के हमलों और मानव-पशु संघर्ष के बढ़ते मामलों की तरफ खींचने के लिए ऐसा किया.

राज्य के कई इलाके खासकर नासिक, अहमदनगर, पुणे और विदर्भ के कुछ हिस्सों में मानव-वन्यजीव संघर्ष में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों में भय और चिंता बढ़ी है. मीडिया से बात करते हुए सोनवणे ने कहा कि उनका यह अनोखा पहनावा लोगों के दैनिक जीवन में व्याप्त डर का प्रतीक है. उन्होंने सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि;

  • वन विभाग की निगरानी और गश्त बढ़ानी चाहिए
  • गांवों में भटककर आने वाले तेंदुओं का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्वास हो
  • स्थानीय समुदायों के लिए जागरूकता अभियान चलाई जानी चाहिए
  • पीड़ितों को उचित मुआवज़ा और सहायता मिले

इस बीच महायुति सरकार ने निर्णय लिया है कि तेंदुए भोजन की तलाश में जंगलों से बाहर न आएं, इसके लिए जंगलों में ही बड़ी संख्या में बकरियां और भेड़ें छोड़ी जाएंगी. हालांकि इस निर्णय को अभी आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है. लेकिन पुणे के कुछ क्षेत्रों में तेंदुए के लिए बकरियां छोड़े जाने की शुरुआत हो चुकी है. यह जानकारी राज्य के वनमंत्री गणेश नाईक ने दी.

हिंसक जानवरों को जंगल में पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा- मंत्री

वनमंत्री नाईक से जब इन हमलों पर प्रश्न पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "हिंसक जानवरों को जंगल में अब पर्याप्त भक्ष्य नहीं मिल रहा है. इसलिए हम हर जिले में तेंदुओं के लिए गले में टैग लगी बकरियां या भेड़ें जंगल में छोड़ने का विचार कर रहे हैं. जैसे प्रत्येक गांव में एक नंदी होती है, उसी तरह ये बकरियां होंगी. बच्चों और नागरिकों पर इनका का खतरा न हो, इसलिए कुछ जगहों पर ये बकरियां पहले ही छोड़ी गई हैं. इन्हें संरक्षण देने की जिम्मेदारी नागरिकों की भी है.”

उन्होंने आगे कहा, "तेंदुआ पहले वन्यजीव था, लेकिन अब वह गन्ने के खेतों में अधिक पाया जाता है. गन्ने के खेतों में उनकी संख्या बढ़ती जा रही है, यही कारण है कि तेंदुओं की आबादी में वृद्धि हुई है. फिलहाल तेंदुआ अनुसूची-1 के वन्यजीवों में शामिल है, लेकिन राज्य सरकार ने इसे अनुसूची-2 में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है. यदि तेंदुए जंगल में नहीं रह रहे हैं, तो उन्हें वन्यजीव की श्रेणी में गिनना उचित नहीं है. कुछ हद तक तेंदुओं की नसबंदी करने की अनुमति भी केंद्र ने दी है."

मंत्री ने आगे कहा कि लक्ष्य यह है कि राज्य के हर जंगल में तेंदुओं की संख्या संतुलित रहे और उन्हें जंगल में ही पर्याप्त भोजन मिले. जुन्नर, आंबेगांव और शिरूर तालुकों में इस योजना की शुरुआत हो चुकी है.

अफ्रीका भेजने पर किया जा रहा विचार- मंत्री

गणेश नाईक ने यह भी बताया कि जिन क्षेत्रों में तेंदुए की संख्या अत्याधिक है, वहां से अफ्रीका भेजने पर भी विचार किया जा रहा है. अफ्रीका में शेर और बाघ हैं, लेकिन तेंदुआ नहीं हैं. इसलिए यदि महाराष्ट्र के तेंदुओं को वहां भेजने की मांग की जाए, तो हम उस पर विचार करने को तैयार हैं. नाईक ने कहा कि इस संबंध में केंद्र से चर्चा हुई है और केंद्र ने राज्य सरकार से लिखित प्रस्ताव भेजने को कहा है.

About the author वैभव परब

वैभव परब एबीपी न्यूज़ पर महाराष्ट्र की राजनीति को बारिकी से समझाते हैं. 

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