UCC के विरोध में मुस्लिम नेता, अब शरद पवार गुट ने कहा, 'गलतफहमी है कि...'
शरद पवार गुट के नेता जितेंद्र आव्हाड ने एक समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कहा कि सिर्फ मुसलमान-मुसलमान करके इस कानून को एक ही नजर से मत देखिए. विविधता इस देश की ताकत रही है.

UCC को लेकर शरद पवार गुट ने प्रतिक्रिया दी है. एनसीपी (एसपी) नेता जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि इस देश की कानूनी व्यवस्था कहीं गड़बड़ न हो, इसका खयाल रखना चाहिए. मीडिया ने जब उनसे सवाल किया कि मुस्लिम नेता इसका विरोध कर रहे हैं तो इस पर उन्होंने कहा, "सवाल मुसलमानों का नहीं है. आपको उसको मुसलमानों की तरफ मत जोड़िए. आपको ये गहलतफहमी है.''
विविधता इस देश की ताकत रही- जितेंद्र आव्हाड
उन्होंने आगे कहा कि आदिवासियों में कुछ अलग-अलग धार्मिक नीतियां हैं. सिखों में कुछ अलग-अलग विधियां हैं. पारसियों में हैं. सिर्फ मुसलमान-मुसलमान करके इसको कानून को एक ही नजर से मत देखिए. विविधता इस देश की ताकत रही है. हम हमेशा कहते हैं कि अनेकताओं में एकता, यही है देश की विशेषता.
अभी सिर्फ उत्तराखंड में यूसीसी लागू
दरअसल, UCC पर गृह मंत्री शाह ने हाल ही में कहा कि 2029 से पहले एनडीए शासित 21 राज्य इसे लागू करेंगे. अभी सिर्फ उत्तराखंड ही ऐसा राज्य है जहां यूसीसी लागू है. यहां बीजेपी की सरकार है. वहीं, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की विधानसभाओं से ये पास हो चुका है लेकिन लागू नहीं है.
अमित शाह के बयान के बाद NDA के अंदरखाने भी सवाल उठने लगे. जेडीयू नेता श्याम रजक ने कह दिया कि बिहार में इसे लागू नहीं होने लगे. बीजेपी के सहयोगी चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने भी इसका सीधे तौर पर समर्थन नहीं किया. दोनों ने 'वेट एंड वॉच' का रुख अपनाया. गृह मंत्री के बयान के बाद असदुद्दीन ओवैसी सहित कई मुस्लिम नेताओं ने इसका विरोध किया.
शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर क्या बोले आव्हाड?
स्कूलों की हालत और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी. आव्हाड ने कहा, "अगर हम शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर रहते तो जिला परिषद स्कूल और दूर गावों के स्कूल बंद तो नहीं करते. महाराष्ट्र में कितने स्कूल बंद हो गए हैं. कितने स्कूल ऐसे हैं जिनमें शिक्षक ही नहीं हैं. गंभीर ही नहीं हैं हम. शिक्षा पर बजट के हिस्से को कम कर दिया गया है. अगर एजुकेशन को लेकर हम गंभीर नहीं हैं तो हमारा भविष्य अंधकार में है."
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