महाराष्ट्र में कहीं आग उगल रहा सूरज तो कहीं आफत बनी बारिश, गर्मी से सैंकड़ों चमगादड़ों की मौत
Maharashtra Weather Update: भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, विदर्भ में आज भी गर्मी का कहर जारी रहेगा. अमरावती, वर्धा, चंद्रपुर और गढ़चिरौली में भीषण गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है.

- मराठवाड़ा में बेमौसम बारिश, बिजली गिरने से पशुओं की मौत, फसल बर्बाद.
महाराष्ट्र में झुलसा देने वाली गर्मी दिनों दिन बढ़ती जा रही है. यहां जबरदस्त हीटवेव देखने को मिल रही है. कुछ इलाकों का तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया है. इसका प्रभाव वन्यजीवों पर भी देखने को मिल रहा है. वहीं, कुछ जगहों पर मानसून से पहले बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा रही है. विदर्भ के ब्रह्मपुरी और उसके आस-पास के इलाकों में तापमान बहुत अधिक बढ़ गया है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है. इसके विपरीत राज्य के तटीय इलाकों और पश्चिमी महाराष्ट्र में मौसम बदल गया है और यहां बारिश का अनुमान लगाया गया है.
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, विदर्भ में आज भी गर्मी का कहर जारी रहने की संभावना है. अमरावती, वर्धा, चंद्रपुर और गढ़चिरौली में भीषण गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है. वहीं, नागपुर और अकोला जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. ऐसे में नागरिकों से दोपहर में जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर न निकलने की अपील की गई है.
ब्रह्मपुरी देश के सबसे गर्म स्थानों में से एक
सोमवार (25 मई) को विदर्भ के ब्रह्मपुरी में 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था और यह देश के सबसे गर्म स्थानों में से एक रहा. इसके बाद, नागपुर में 46.5, गढ़चिरौली में 46.4, गोंदिया में 46.1, चंद्रपुर में 46, वर्धा में 46, अकोला में 45.4, अमरावती में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है. आज भी भीषण गर्मी की संभावना जताई गई है. भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर वन्यजीवों पर पड़ रहा है.
गढ़चिरौली में गर्मी से सैकड़ों चमगादड़ों की मौत
गढ़चिरौली जिले के सिरोंचा में अचानक 500 चमगादड़ों की मौत का मामला सामने आया है. वन्य विभाग का अनुमान है कि यह मौत लू लगने की वजह से हुई होगी. इनमें से कुछ मृत चमगादड़ों को मेडिकल जांच के लिए भेज दिया गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मियों के मौसम में वन्यजीवों की सुरक्षा के उपायों को लेकर घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन, जमीनी हकीकत अलग है. यहां पानी की सुविधाओं की कमी के कारण सैकड़ों जंगली जीवों की मौत हो गई है.
मराठवाड़ा में मानसून से पहले बारिश ने मचाई तबाही
वहीं, सोमवार को मराठवाड़ा के लातूर शहर और निलंगा तालुका इलाकों में तूफानी बारिश और बिजली गिरने से भैंसों और बैलों की मौत हो गई है. घरों और खेतों को बहुत नुकसान पहुंचा है. तूफान इतना तीव्र था कि कई पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे बिजली सप्लाई भी ठप हो गई. कई घरों की छतें उड़ गईं, जबकि खेतों में शेड और जानवरों का चारा बर्बाद हो गया. आम के पेड़ों पर भी इसका असर देखने को मिला. निलंगा (नेल्वाड़) के दो किसानों पर बिजली गिरने से उनकी मौत हो गई. गांववालों ने मांग की है कि प्रभावित किसानों को तुरंत पंचनामा और सरकारी मदद दी जाए.
बारिश से 700 हेक्टेयर से ज्यादा केले के बाग तबाह
मानसून से पहले की बारिश ने जलगांव जिले के चोपड़ा और यावल तालुका में केले की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. अनुमान है कि इससे 700 हेक्टेयर से अधिक केले के बाग तबाह हो गए हैं. पहले ही खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात और देश में तेल की कमी की वजह से केले के किसानों को नुकसान हुआ है और अब बारिश ने बची उम्मीदों पर पानी सा फेर दिया है.
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Source: IOCL


























