Maharashtra: बॉम्बे हाईकोर्ट और अमेरिकी काउंसलेट को मिले धमकी भरे ईमेल, बढ़ाई गई सुरक्षा
Bomb Threat in Maharashtra: बॉम्बे हाईकोर्ट और अमेरिकी काउंसलेट को धमकी भरे ईमेल मिलने के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई. आरोपी ने Tor/Onion Router का इस्तेमाल किया. जिससे उसे ट्रेस करना मुश्किल हो रहा है.

बॉम्बे हाईकोर्ट को हाल ही में लगातार धमकी भरे ईमेल मिलने से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है. 19 सितंबर को आए ईमेल में हाईकोर्ट के साथ-साथ बीकेसी स्थित अमेरिकी काउंसलेट को भी निशाना बनाया गया. इस ईमेल को भेजने के लिए आरोपी ने ऑनियन राउटर (Tor) का इस्तेमाल किया, जिससे असली भेजने वाले तक पहुंचना मुश्किल हो गया.
धमकी में राजनीति और धमाके का जिक्र
ताजा ईमेल में तमिलनाडु की राजनीति पर टिप्पणी की गई और मौजूदा सरकार पर भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है. ईमेल में यह भी लिखा था कि “शुक्रवार की नमाज के बाद हाईकोर्ट परिसर में धमाका होगा.” इस संदेश के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं और हाईकोर्ट परिसर की निगरानी बढ़ा दी गई.
पहले भी आ चुके हैं धमकी भरे ईमेल
ये पहली बार नहीं है जब हाईकोर्ट को इस तरह का धमकी भरा ईमेल मिला हो. 12 सितंबर को भी बॉम्बे हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट को धमकी भरा ईमेल मिला था. उस दिन मेल सुबह 9 बजे हाईकोर्ट की ई-कोर्ट्स आईडी पर आया.
दोपहर तक रजिस्ट्रार ने पुलिस को सूचित किया. बम निरोधक दस्ते (BDDS) मौके पर पहुंचे और पूरे परिसर को खाली कराया. तलाशी के बाद कुछ संदिग्ध नहीं मिला और पुलिस ने इसे हॉक्स ईमेल बता दिया.
साइबर टूल्स से मिल रही चुनौती
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने Orbot, Tor, Brave, Dark Web, I2P और Onion Router जैसे ब्राउजर का इस्तेमाल किया. ये ब्राउजर अक्सर उन मामलों में सामने आते हैं, जहां अपराधी अपनी असली पहचान छुपाकर जांच को गुमराह करना चाहते हैं. ये टूल्स असली आईपी एड्रेस को कई परतों में ढक देते हैं और जांच को उलझा देते हैं.
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने माइक्रोसॉफ्ट से मदद मांगी थी. कंपनी ने बताया कि मेल नीदरलैंड्स से भेजा गया है, लेकिन ऑनियन राउटर के इस्तेमाल की वजह से आगे की कड़ी पकड़ना मुश्किल हो रहा है.
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब कुछ विशेष तकनीक और साइबर टूल्स की मदद से जांच को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. साथ ही, हाईकोर्ट और अमेरिकी काउंसलेट दोनों जगह अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है. सुरक्षा गार्ड बढ़ा दिए गए हैं और परिसर में निगरानी कैमरों की संख्या भी बढ़ा दी गई है.
पुलिस का कहना है कि इस तरह के साइबर टूल्स और ब्राउजर आने वाले समय में जांच के लिए चुनौती बन सकते हैं. इसलिए ऐसे मामलों में तकनीक और मानव संसाधन दोनों का इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है.
























