Mumbai Bomb Threat: एक बार फिर निशाने पर बॉम्बे हाई कोर्ट! बम धमकी के बाद मचा हड़कंप
Mumbai Bomb Threat: मुंबई हाई कोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है. धमकी मिलते ही मुंबई पुलिस और एटीएस की टीम हाई कोर्ट परिसर में अलर्ट मोड पर पहुंच गई है.

मुंबई हाई कोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है. धमकी मिलते ही मुंबई पुलिस और एटीएस की टीमें तुरंत हाई कोर्ट परिसर में अलर्ट मोड पर पहुंच गईं और गहन तलाशी अभियान चलाया. डॉग स्क्वाड की टीम भी मौके पर रवाना हुई और जांच जारी है.
फिलहाल परिसर में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है, लेकिन यह घटना हाल के दिनों में हाई कोर्ट को निशाना बनाकर की गई दूसरी धमकी है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और जांच
मुंबई पुलिस ने धमकी के बाद हाई कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी. पूरे परिसर की बारीकी से तलाशी ली गई, लेकिन कुछ भी संदिग्ध बरामद नहीं हुआ. अधिकारियों के अनुसार यह घटना 12 सितंबर को मिली इसी तरह की धमकी के बाद सामने आई है. उस समय भी एहतियातन पूरी इमारत खाली कराई गई थी और बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए गए थे. बावजूद इसके कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला था. लगातार मिल रही धमकियों से सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट लेवल और बढ़ा दिया है.
देशभर में बढ़ते फर्जी बम कॉल्स
यह धमकी ऐसे समय में आई है जब देश के अन्य हाई कोर्ट भी इसी तरह की झूठी धमकियों का सामना कर चुके हैं. हाल ही में दिल्ली और बॉम्बे हाई कोर्ट दोनों को बम की धमकी दी गई थी जो बाद में झूठी खबर निकली. इस सप्ताह की शुरुआत में सोमवार को गुजरात हाई कोर्ट को भी ई-मेल के जरिए धमकी मिली थी. सुरक्षा दलों ने वहां भी गहन तलाशी अभियान चलाया और बाद में इसे झूठी धमकी बताया. यह इस साल जून के बाद से गुजरात हाई कोर्ट को मिली तीसरी फर्जी धमकी थी, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में सतर्कता और बढ़ गई है.
पहले भी मिल चुकी है धमकी
मुंबई पुलिस और एटीएस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं. ये पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई हो. वहीं जांच एजेंसियां धमकी देने वाले स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं ताकि लगातार हो रही इन घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके. अधिकारियों का कहना है कि हाई कोर्ट परिसरों में सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जाएगा तथा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी बढ़ाई जाएगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे फर्जी कॉल्स का मकसद प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करना हो सकता है, इसलिए जांच एजेंसियां तकनीकी ट्रैकिंग और साइबर विश्लेषण पर भी जोर दे रही हैं.
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Source: IOCL


























