भिवंडी इमारत हादसे में 7 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी
Bhiwandi Building Collapse: महानगरपालिका ने पहले ही इस इमारत को 'खतरनाक' घोषित कर रखा था. शाम 6 बजे से बिल्डिंग में दरारे दिखनी शुरू हो गई थीं. कुछ समय बाद बिल्डिंग झुकने भी लगी.

महाराष्ट्र के भिवंडी में गुरुवार (30 जुलाई) देर रात बड़ा हादसा हो गया. भिवंडी महानगरपालिका क्षेत्र के बालाजी नगर-गंगारामवाड़ी स्थित कोहिनूर अपार्टमेंट नाम की ग्राउंड प्लस चार मंजिला जर्जर इमारत ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गई. हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की खबर है. वहीं, कई लोगों के दबे होने की आशंका के बीच रेस्क्यू जारी है
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और महानगरपालिका की आपदा प्रबंधन टीम मौके पर पहुंची, लेकिन संकरी गली होने के कारण राहत कार्य में शुरुआती दिक्कतें आईं. बाद में NDRF और TDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं. रास्ते में बनी एक पुरानी चॉल को जेसीबी से हटाने के बाद बचाव दल मलबे तक पहुंच सका और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया.
कोहिनूर अपार्टमेंट का असेसमेंट वर्ष 2007 में हुआ था, जबकि इमारत का निर्माण 2012 में किया गया था. इमारत में दो विंग थे. निर्माण की गुणवत्ता कमजोर होने के कारण यह शुरू से ही जर्जर मानी जा रही थी और महानगरपालिका ने इसे खतरनाक घोषित कर नोटिस भी जारी किया था. एक विंग के ग्राउंड फ्लोर के पिलर कमजोर होने के कारण उनकी मरम्मत का काम चल रहा था.
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#WATCH | Bhiwandi, Maharashtra: Morning visuals from the spot in Bhiwandi where emergency rescue teams are working extensively after a four-storey building partially collapsed. pic.twitter.com/qFxTuCHhJG
— ANI (@ANI) July 31, 2026
शाम 6 बजे से दिखने लगी थीं दरारे
गुरुवार शाम करीब 6.00 बजे से इमारत में दरारें पड़ने लगी थीं. रात आठ बजे इमारत झुकने की सूचना मिलने पर प्रभाग समिति क्रमांक चार के सहायक आयुक्त अरविंद घोगरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और इमारत खाली कराई जा रही थी. कुछ लोग सामान निकालने के लिए अंदर मौजूद थे और मरम्मत का काम भी जारी था. इसी बीच इमारत अचानक ढह गई.
पहले ही खतरनाक घोषित थी इमारत
महानगरपालिका पहले ही इस इमारत को खतरनाक घोषित कर नोटिस चस्पा कर चुकी थी. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ग्राउंड फ्लोर पर चल रहे मरम्मत कार्य के दौरान यह हादसा हुआ. फिलहाल मलबे में 5 से 6 लोगों के फंसे होने की आशंका है. मौके पर NDRF, TDRF, फायर ब्रिगेड और अन्य राहत एजेंसियां संयुक्त रूप से बचाव कार्य में जुटी हैं. यह जानकारी विधायक महेश चौघुले ने दी.
प्रशासन का कहना है कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता है. महानगरपालिका की सभी टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं. महापौर नारायण चौधरी ने कहा कि इमारत पहले से ही खतरनाक घोषित होने के कारण अधिकांश लोगों को बाहर निकाल लिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया. उन्होंने नागरिकों से अपील की कि खतरनाक घोषित इमारतों में रहने का जोखिम न उठाएं. प्रभावित परिवारों के लिए नजदीकी स्कूलों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी रहने की व्यवस्था भी की गई है.
खुद मलबे से बाहर निकली एक महिला
हादसे के दौरान इमारत में रहने वाले अरविंद गुप्ता और उनकी पत्नी किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन उनकी बेटी कोमल मलबे में फंस गई. कोमल ने हिम्मत दिखाते हुए खुद ही मलबे से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई. उसने बताया कि इमारत में पिलरों की मरम्मत का काम चल रहा था, तभी अचानक पूरी इमारत ढह गई.
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय युवकों ने राहत कार्य शुरू कर कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. उन्होंने मलबे में फंसे दो लोगों को भी बाहर निकालने में सफलता हासिल की. हालांकि अब भी 5 से 6 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है. NDRF, TDRF, फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्थानीय प्रशासन लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं.
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