Mumbai News: फर्जी बाबा अशोक खरात मामले पर AIMIM के वारिस पठान का बड़ा बयान- ‘एपस्टीन नासिक फाइल्स...'
Mumbai News In Hindi: नासिक के कथित ज्योतिषी अशोक खरात केस में जांच तेज हो गई है और आयकर विभाग की एंट्री संभव है. वारिस पठान ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

महाराष्ट्र के नासिक में कथित ज्योतिषी अशोक खरात से जुड़े दुष्कर्म मामले सियासी बयान तेज हैं. AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने आरोप लगाया कि खुद को ‘बाबा’ बताने वाला यह व्यक्ति महिलाओं का शोषण करता था और कई राजनेता उसके संपर्क में थे. मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार से पूरी जांच की मांग उठी है.
वारिस पठान ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हैं, जिनमें कथित बाबा के साथ प्रभावशाली लोग नजर आ रहे हैं. ये तो जांच का मामला है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शासन को इसकी जानकारी नहीं थी और क्यों समय रहते कार्रवाई नहीं हुई. एएनआई को दिए बयान में उन्होंने यह भी कहा कि सच्चाई सामने आना जरूरी है ताकि ऐसे ‘ढोंगी बाबा’ बेनकाब हो सकें और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: On alleged rape case involving Nashik astrologer Ashok Kharat, AIMIM national spokesperson Waris Pathan says, "Several videos and photos are going viral. It is a matter of investigation that a 'baba' who called himself an astrologer and who was… pic.twitter.com/UUGH1QuavX
— ANI (@ANI) March 22, 2026
आयकर विभाग की नजर, वित्तीय जांच की तैयारी
बता दें कि मामला अब सिर्फ आपराधिक आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि वित्तीय पहलुओं की जांच भी शुरू होने वाली है. सूत्रों के मुताबिक आयकर विभाग जल्द ही इस केस में एंट्री कर सकता है और खरात की आय के स्रोतों की गहराई से पड़ताल करेगा. बैंक ट्रांजैक्शन्स, निवेश और पैसों के लेन-देन के रिकॉर्ड को खंगाला जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके पास आया धन कहां से आया और उसका उपयोग किन कार्यों में हुआ.
फंडिंग और संपत्तियों पर भी कड़ी नजर
जांच एजेंसियां केवल अशोक खरात तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उन लोगों को भी दायरे में लेंगी जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें फंडिंग दी या किसी प्रकार की साझेदारी की. डोनर रिकॉर्ड्स और वित्तीय खुलासों की भी जांच की जाएगी. अधिकारियों का फोकस उनकी खरीदी गई संपत्तियों पर भी रहेगा, जहां यह जांच होगी कि इन संपत्तियों के लिए इस्तेमाल किया गया पैसा वैध था या नहीं. यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
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Source: IOCL




























