अकोला में नामकरण पर नया बवाल! BJP ने टीपू सुल्तान का बोर्ड हटाकर धर्मवीर संभाजी महाराज का लगाया
Akola News: अकोला महानगरपालिका के मुख्य सभागृह के नामकरण को लेकर फिर विवाद भड़क गया है. BJP समर्थकों ने ‘टीपू सुल्तान’ का बोर्ड हटाकर ‘धर्मवीर संभाजी महाराज’ का बोर्ड लगा दिया.

महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान के नाम पर मचा बवाल अब एक कदम और आगे बढ़ गया है. अकोला महानगरपालिका के मुख्य सभागृह के नामकरण को लेकर शहर में एक बार फिर राजनीतिक घमासान शुरू होता दिख रहा है. बता दें कि साल 2012 में इस सभागृह का नाम ‘टीपू सुल्तान’ रखा गया था, लेकिन हालिया विवाद के बाद BJP पार्षद पवन महल्ले और समर्थकों ने नाम बदलकर ‘धर्मवीर संभाजी महाराज’ का बोर्ड लगा दिया है.
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत मालेगांव के नगर निगम ऑफिस में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने से शुरू हुई थी, लेकिन यह बवाल और तब बढ़ गया जब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपती शिवाजी महाराज से कर दी. इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल ऐसा गरमाया गया कि हर राजनीतिक पार्टी इसमें कूद पड़ी. जहां एक तरफ BJP ने इसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का अपमान बताया है वहीं शिवसेना यूबीटी ने भी कांग्रेस के इस बयान की निंदा की है.
वहीं अब अकोला में लंबे समय से चले आ रहे नामकरण को लेकर विवाद में टीपू सुल्तान का सुर्खियों में आना इसे और ताजा कर दिया है. साल 2012 से महानगरपालिका के मुख्य सभागृह का नाम ‘टीपू सुल्तान’ रखा गया था. तब से यह नाम आधिकारिक रूप से उपयोग में था, लेकिन BJP ने अब इस नाम पर आपत्ति दर्ज करते हुए इसे बदलने की खुली चुनौती दी है.
BJP की कार्रवाई और नई मांग
BJP पार्षद पवन महल्ले और उनके समर्थकों ने सभागृह के बाहर लगा ‘टीपू सुल्तान’ का बोर्ड हटाकर वहां ‘धर्मवीर संभाजी महाराज’ का नया बोर्ड लगा दिया. इस कदम को लेकर नगर राजनीति में हलचल तेज हो गई है. पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे ऐतिहासिक सुधार बताया है.
BJP का कहना है कि सभागृह का नाम ऐसे व्यक्तित्व पर होना चाहिए, जो प्रदेश और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत हों. इसी के चलते समर्थकों ने प्रशासनिक निर्णय का इंतजार किए बिना खुद ही बोर्ड बदल दिया.
शिवसेना (शिंदे गुट) की भूमिका
इस विवाद में शिवसेना (शिंदे गुट) भी सक्रिय नजर आई. महानगर प्रमुख राजेश मिश्रा ने प्रशासन को निवेदन सौंपकर सभागृह का नाम छत्रपती संभाजी महाराज या एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने की मांग की है.
लगातार बदलते घटनाक्रम के बीच अकोला में राजनीतिक माहौल गरमा गया है. 2012 से चले आ रहे ‘टीपू सुल्तान’ नाम को बीजेपी ने खुली चुनौती दी है और समर्थकों द्वारा खुद बोर्ड लगाने की घटना ने इस विवाद को और तेज कर दिया है. अब प्रशासन के अंतिम निर्णय पर सभी की नजर टिकी हुई है.
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Source: IOCL

























