Sehore News: सीहोर में बिजली संकट से हाहाकार! उमस और अंधेरे ने छीना सुकून, बाजारों में लौटी लालटेन
Sehore News In Hindi: मध्य प्रदेश के सीहोर में भीषण गर्मी और अघोषित बिजली कटौती से हाहाकार मचा है. बिजली संकट इतना गहरा गया है कि बाजारों में एक बार फिर दशकों पुरानी लालटेनें बिकने लगी हैं.

मौसम के तीखे तेवर और आसमान से बरसती आग के बीच इन दिनों सीहोर वासी एक दोहरे अभिशाप से जूझ रहे हैं. एक तरफ जहां प्रकृति अपने प्रचंड वेग से लोगों को झुलसा रही है, वहीं दूसरी तरफ विद्युत विभाग की अघोषित कटौती ने नागरिकों के जीवन को नारकीय बना दिया है. भीषण गर्मी और दमघोंटू उमस के इस दौर में जब इंसान को चंद पलों के चैन की दरकार है, तब रात के स्याह अंधेरे में उन्हें सिसकने के लिए बेबस छोड़ दिया गया है. (रिपोर्ट: धर्मेंद्र यादव)
यह सिर्फ बिजली की कटौती नहीं, बल्कि आम जनमानस के सब्र की परीक्षा है. रात होते ही पूरा शहर एक गहरे, डरावने सन्नाटे और घुटन की आगोश में समा जाता है. आधुनिकता के इस दौर में सीहोर की जनता खुद को आदिम युग की विभीषिका में धकेली हुई महसूस कर रही है.
- मासूम और बुजुर्ग बेहाल: गर्मी और उमस से जहां मासूम बच्चे बिलख रहे हैं, वहीं बुजुर्गों की सांसें अटक रही हैं.
- नींद हराम: आम लोग रात भर करवटें बदलते-बदलते सुबह करने को मजबूर हैं.
- बढ़ता आक्रोश: पसीने की हर बूंद के साथ व्यवस्था के प्रति लोगों का आक्रोश और लाचारी साफ देखी जा सकती है.
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विकास के दावों के बीच 'लालटेन' का पुनर्जन्म
विद्युत संकट की इस चरम सीमा ने शहर को एक ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी. कल तक जो लालटेनें अतीत के झरोखों और कबाड़खानों की धूल फांक रही थीं, आज वे जिला मुख्यालय के बाज़ारों की मुख्य दुकानों पर सज गई हैं. डिजिटल इंडिया और जगमगाते शहरों के दौर में, सीहोर की सड़कों पर लालटेन का बिकना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली ने जनता को दशकों पीछे धकेल दिया है.
बाजार में लालटेन की अचानक बढ़ी मांग को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो विकास की रोशनी पर अंधेरे ने पूरी तरह से विजय प्राप्त कर ली हो. लोग भारी मन से, व्यवस्था को कोसते हुए इन लालटेनों को खरीद रहे हैं ताकि कम से कम रात के उस घने अंधेरे को थोड़ा कम किया जा सके जो उनके अपनों को डरा रहा है.
कब जागेगा प्रशासन?
नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है. जब दिन का तापमान शरीर को झुलसा रहा हो, तब रातों की नींद छीन लेना किसी प्रताड़ना से कम नहीं है. जिला प्रशासन और बिजली कंपनी के बड़े-बड़े दावों की पोल इन दिनों सीहोर की गलियों में बिकती लालटेनें खोल रही हैं.
अब देखना यह है कि सोई हुई व्यवस्था इस अंधेरे को चीरकर कब जागती है, या फिर सीहोर की जनता को यूं ही अपनी किस्मत के भरोसे छोड़ दिया जाएगा.
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