MP Assembly Election 2023: कांग्रेस-बीजेपी को जिताऊ चेहरों की तलाश, सरकारी कर्मचारियों पर भी खेल सकते हैं दांव
MP Election 2023: ऐसा कर दोनों पार्टियां एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश कर रही हैं. अधिकारियों-कर्मचारियों को विधानसभा का टिकट देने से न केवल अच्छा मैसेज जाएगा बल्कि उनकी नाराजगी भी कम होगी.

MP Assembly Election: मध्य प्रदेश में नवंबर 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव (Madhya Pradesh Assembly Elections) में जिताऊ चेहरे की तलाश बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों ओर से चल रही है. इसी कवायद के चलते कहा जा रहा है कि कुछ कार्यरत या रिटायर्ड सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर दोनों दल दांव खेल सकते हैं. माना जा रहा है कि इससे एक तीर से दो निशाना लगाने की कोशिश है. अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच के चेहरे को विधानसभा का टिकट देने से न केवल अच्छा मैसेज जाएगा बल्कि उनकी नाराजगी भी कम होगी.
मध्य प्रदेश में कर्मचारियों का बड़ा वोट बैंक
यहां बता दें कि मध्य प्रदेश में कर्मचारियों का बड़ा वोट बैंक है. उनके बीच पुरानी पेंशन स्कीम और 6 साल से अटके प्रमोशन का बड़ा मुद्दा है. फिलहाल इन दोनों ही मुद्दों पर बीजेपी कर्मचारियों की नाराजगी झेल रही है. कांग्रेस ने पहले से ही बड़ादावं खेलते हुए ऐलान किया है कि सरकार में वापसी होते ही पुरानी पेंशन स्कीम बहाल कर दी जाएगी.
दो रिटायर्ड IAS के चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर
मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों के चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है. इसमें से एक बीजेपी के तो दूसरे कांग्रेस की टिकट के दावेदार हैं. कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में कलेक्टर रहे रिटायर्ड आईएएस वेद प्रकाश को जबलपुर की एक सीट से बीजेपी अपना चेहरा बना सकती है. वेद प्रकाश जबलपुर नगर निगम में कमिश्नर भी रहे हैं और उनकी कार्यशैली के यहां के लोग कायल हैं. इसी तरह कांग्रेस की बातचीत एक अन्य रिटायर्ड आईएएस जगदीश जटिया से चल रही है. जटिया दलित वर्ग से आते हैं उन्हें अच्छा प्रशासक माना जाता था. इसलिए कांग्रेस उनको टिकिट देकर दलितों वोटरों को साधने की कोशिश कर सकती है.
एमपी में पहले भी रहा है कर्मचारी, ब्यूरोक्रेट्स को टिकट देने का चलन
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में ब्यूरोक्रेट्स और कर्मचारी नेताओं को विधायक का टिकिट देने का चलन पहले भी रहा है. अपने समय के दबंग आईपीएस अधिकारी रुस्तम सिंह तो बीजेपी की टिकिट पर विधानसभा का चुनाव जीतकर मंत्री भी बने थे. इसी तरह राज्य अध्यापक संघ के तत्कालीन प्रांताध्यक्ष मुरलीधर पाटीदार ने 2013 में बीजेपी की टिकिट पर सुसनेर से चुनाव लड़ा था और जीतकर विधायक बने थे. हाल ही में प्रदेश के कर्मचारी महागठबंधन ने बीजेपी और कांग्रेस सहित अन्य दलों से कार्यरत या सेवानिवृत कर्मचारियों को भी चुनाव में मौका देने की मांग की है.
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