होली में पांच दिन तक होता है रंग-गुलाल-फाग गायन, सूर्यवंशी समाज निभाता है लोक गीत की परंपरा
Holi 2025 Celebration: आधुनिकता के दौर में विलुप्त हो रही लोक परंपराओं को सूर्यवंशी समाज ने संजोकर रखा है. सीहोर के फ्रीगंज गांव में आज भी पांच दिनों तक होली पर बुंदेलखंडी लोकगीत गाए जाते हैं.

Holi 2025: आधुनिक युग में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं. पुरानी संस्कृति, परंपराएं और मान्यताएं विलुप्त होती जा रही हैं. सीहोर में लोक परंपराओं को संजोए रखने का प्रयास जारी है. लोकपर्व होली में लोकगीतों का बड़ा महत्व है. फ्रीगंज गांव में आज भी होली पर बुंदेलखंडी लोकगीत गाए जाते हैं. लोकगीतों के साथ ढोलक, नगडिया, झांझ मजीरे, खंजड़ी की धुन सुनाई देने लगी हैं. पांच दिनों के होली उत्सव की शुरुआत हो चुकी है. फाग गायन की टोलियां बैठ गई हैं.
सूर्यवंशी अहिरवार समाज के लोग आज भी वर्षों पुरानी लोक परम्पराओं का निर्वहन करने में जुटे हैं. युवा भी बुजुर्गों से साझी विरासत को सीख रहे हैं. फ्रीगंज गांव में पांच दिन तक रंग गुलाल के साथ फाग गायन का कार्यक्रम चलता है. लोकगीतों में होली गीतों के साथ रामायण, महाभारत, देवीगीत, भगवान शिव, गणेश का उल्लेख होता है.
होली में पांच दिनों तक रंग, गुलाल, फाग गायन
सूर्यवंशी समाज के लोग फाग, राई, स्वांग, ढिमरयाई शैली में गायन करते हैं. होली पर सबसे पहले शोक संतप्त परिवारों के घर जाकर रंग डालने की परंपरा है. मकसद परिवारों को शोक के माहौल से निकालकर रंगों में रंगना होता है.
सीहोर के फ्रीगंज गांव में निभाई जाती है परंपरा
पूरे पांचों दिन तक लोक गायन मंडलियां गाती हैं. बुजुर्गों का कहना है कि नई पीढ़ी में फाग गायन के प्रति कोई रुचि नहीं रह गई है. आधुनिकता की दौड़ में लोक परंपराएं कमजोर होती जा रही हैं. अहिरवार समाज लोक परंपराओं की विरासत को कायम रखे हुए है. होली पर बुंदेलखंडी लोकगीत के आयोजन में बुजुर्ग और युवा भी शामिल होते हैं. बुंदेलखंडी लोकगीतों की मधुर गूंज सुनाई देने लगी है.
धर्मेंद्र यादव की रिपोर्ट
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