MP: दिग्विजय सिंह के भाई पर गिर सकती है गाज, कांग्रेस दिखाएगी बाहर का रास्ता? जानें वजह
Digvijaya Singh Brother Laxman Singh: कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह के विवादित बयानों पर पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसके जवाब से पार्टी संतुष्ट नहीं है.

Digvijaya Singh Brother Laxman Singh News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व CM दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह एक बार फिर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं. हाल ही में दिए गए विवादित बयानों के चलते कांग्रेस ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका जवाब अब मिल चुका है, लेकिन कांग्रेस इस उत्तर से संतुष्ट नहीं है. अनुशासन समिति ने लक्ष्मण सिंह के जवाब को असंतोषजनक करार देते हुए उन पर कड़ी कार्रवाई की सिफारिश का मन बना लिया है.
राहुल गांधी, उमर अब्दुल्ला और रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ दिया था विवादित बयान
लक्ष्मण सिंह ने हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ विवादित बयान दिए थे. विशेष रूप से उमर अब्दुल्ला को लेकर उन्होंने कहा था कि वे “आतंकवादियों से मिलीभगत” कर सकते हैं. इस बयान से कांग्रेस में व्यापक नाराजगी फैल गई. पार्टी के अनुशासन समिति के अध्यक्ष और सांसद तारिक अनवर ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए 9 मई को लक्ष्मण सिंह को नोटिस जारी किया था और उनसे 10 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया था.
कारण बताओ नोटिस के जवाब से संतुष्ट नहीं कांग्रेस
बताया जा रहा है कि लक्ष्मण सिंह का जवाब पार्टी को रास नहीं आया और इसे अनुशासन समिति ने संतोषजनक नहीं माना है. अब पार्टी उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने जा रही है. कांग्रेस के भीतर यह माना जा रहा है कि लक्ष्मण सिंह के बयानों से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा है और वह संगठन में बार-बार असहजता का कारण बनते जा रहे हैं. यह पहला मौका नहीं है जब उनके बयानों ने पार्टी को कटघरे में खड़ा किया हो.
गौरतलब है कि लक्ष्मण सिंह पहले बीजेपी में भी शामिल रह चुके हैं और फिर कांग्रेस में वापसी की थी. वर्तमान में वे कांग्रेस के सदस्य हैं लेकिन उनके हालिया तेवरों से ऐसा लगता है कि उनका पार्टी नेतृत्व से मोहभंग बढ़ता जा रहा है. कांग्रेस नेतृत्व अब यह तय करने के मोड़ पर है कि ऐसे असंतुष्ट नेताओं को पार्टी में बनाए रखा जाए या बाहर का रास्ता दिखाया जाए. आने वाले दिनों में लक्ष्मण सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है.
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