'370 की लड़ाई खत्म करने की सुपारी...', सज्जाद लोन का CM उमर अब्दुल्ला पर हमला
Sajjad Lone on Omar Abdullah: जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस प्रमुख सज्जाद लोन ने NC के जंतर-मंतर प्रदर्शन का न्योता ठुकराया. उमर अब्दुल्ला पर 370 और 35A की लड़ाई खत्म करने का आरोप लगाया.

जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद गनी लोन ने 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है. यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है. हालांकि लोन का कहना है कि उनकी पार्टी का मुख्य मुद्दा केवल राज्य का दर्जा नहीं, बल्कि 5 अगस्त 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति और विशेष दर्जे की बहाली है.
सज्जाद गनी लोन ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा, "हमें जंतर-मंतर पर राज्य का दर्जा बहाल करने के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए NC से निमंत्रण मिला था, लेकिन निमंत्रण भेजने से पहले कोई आम सहमति नहीं बनी थी. हमारा मुख्य रुख विशेष दर्जा और 5 अगस्त 2019 से पहले की स्थिति की बहाली है."
कश्मीर: भद्रवाह में युवक की कथित हत्या पर भड़कीं महबूबा मुफ्ती, 'मुसलमानों को निशाना...'
इसके बाद उन्होंने कहा, "NC को किस चीज के लिए सुपारी दी गई है, यह मुझे नहीं पता." लोन ने आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला को आर्टिकल 370 और 35A की बहाली की बड़ी लड़ाई को खत्म करने का काम दिया गया है.
सज्जाद लोन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा कभी देश की सबसे ताकतवर विधानसभाओं में गिनी जाती थी और आज भी यह लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है. उन्होंने सवाल उठाया कि अब तक नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने विधानसभा से राज्य का दर्जा बहाल करने का एक भी प्रस्ताव क्यों नहीं पारित कराया.
उन्होंने कहा, "J&K विधानसभा कभी भारत की सबसे शक्तिशाली विधानसभा हुआ करती थी, लेकिन आज भले ही वैसी न हो, फिर भी यह लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है. अब तक NC के नेतृत्व वाली विधानसभा ने राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए एक भी प्रस्ताव पारित नहीं किया है."
अंतरात्मा के खिलाफ नहीं जा सकता- लोन
लोन ने कहा कि वह अपनी अंतरात्मा के खिलाफ जाकर केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तक खुद को सीमित नहीं कर सकते. उनके मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली सबसे बड़ा मुद्दा है.
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि J&K विधानसभा का आपातकालीन सत्र बुलाया जाए, एक प्रस्ताव पारित किया जाए और फिर सत्ताधारी और विपक्षी दलों की एक टीम दिल्ली भेजी जाए. विरोध प्रदर्शन से पहले सभी संवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल क्यों न किया जाए? 370 और 35A को विधानसभा नहीं, बल्कि संसद ही बहाल कर सकती है."
BJP और NC दोनों पर साधा निशाना
सज्जाद लोन ने कहा कि बीजेपी पहले ही सही समय पर राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा कर चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस पूरे मुद्दे को जम्मू-कश्मीर की जनता और विधानसभा से दूर कर दिया है.
उन्होंने कहा, "राज्य का दर्जा बहाल करने पर BJP का रुख बिना किसी समय-सीमा के है, लेकिन NC ने विधानसभा को दरकिनार कर दिया है और इसे BJP और भारत के विपक्षी दलों के बीच का मुद्दा बना दिया है, जिससे J&K के निवासी पूरी तरह से इस प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं."
उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिकल 370 हटाने और उसके बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला लोगों को अपमानित करने वाला कदम था और सबसे पहले सम्मान, पहचान और स्वायत्तता की बहाली की लड़ाई लड़ी जानी चाहिए.
फारूक और उमर अब्दुल्ला से पूछे सवाल
सज्जाद लोन ने नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से 3 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की. उन्होंने कहा, "NC ने हमें कभी नहीं बताया कि 3 अगस्त 2019 को PM के साथ हुई बैठक में क्या हुआ था."
इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया, "क्या जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा इसलिए की गई है क्योंकि PM ने J&K को राज्य का दर्जा बहाल करने से 'ना' कह दिया है? क्या यह विरोध प्रदर्शन 370 और 35A को बहाल करने के आंदोलन को खत्म करने के लिए है, न कि राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए?"
20 जुलाई के प्रदर्शन से दूरी, जनवरी में आंदोलन का सुझाव
सज्जाद लोन ने कहा कि वह राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए विरोध प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसके लिए बेहतर समय चुना जाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि संविधान दिवस से जुड़े जनवरी महीने में ऐसा आंदोलन ज्यादा प्रभावी हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर 100 से ज्यादा सांसदों का समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का फैसला किया है. पार्टी के विधायक 19 जुलाई को नई दिल्ली पहुंचेंगे और 20 जुलाई को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करेंगे.
20 जुलाई को दिल्ली में NC का प्रदर्शन, कांग्रेस शामिल होगी या नहीं? साफ किया रुख
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस इस प्रदर्शन से दूरी बनाने वाली अकेली पार्टी नहीं है. कई अन्य क्षेत्रीय दलों ने भी टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कहते हुए इस कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया है.
वहीं पीडीपी और अवामी इत्तेहाद पार्टी (AIP) ने भी इस प्रदर्शन पर आपत्ति जताई है. इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के बीच राज्य का दर्जा और आर्टिकल 370 जैसे मुद्दों पर मतभेद पहले से अधिक गहरे होते जा रहे हैं.














