बंगाल की कंपनी और अमेजन पर ऑनलाइन बिक रही नकली कश्मीरी सिल्क कालीन! प्रशासन ने उठाया बड़ा कदम
Jammu-Kashmir News: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अमेजन और ‘ज्वेल कारपेट’ को नकली कश्मीरी सिल्क कालीन बेचने के आरोप में नोटिस भेजा. अधिकारियों ने 3 दिन में विज्ञापन हटाने और माफी मांगने का निर्देश दिया.

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अमेजन और पश्चिम बंगाल की निजी कंपनी ‘ज्वेल कारपेट’ को नकली कश्मीरी सिल्क कालीन बेचने के आरोप में नोटिस जारी किया है. आरोप है कि दोनों कंपनियां सस्ते मशीन-निर्मित कालीनों को ‘असली कश्मीरी हाथ से बने सिल्क कालीन’ के नाम पर बेच रही थीं.
यह कार्रवाई 13 अगस्त को श्रीनगर से हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग की निदेशक मुसरत ज़िया की शिकायत के बाद हुई. पीटीआई के अनुसार, उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इस मामले को उजागर करते हुए कहा कि ऐसे फर्जी उत्पाद कारीगरों की मेहनत और पारंपरिक कश्मीरी कला की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
शिकायत के आधार और स्क्रीनशॉट से सबूत
मुसरत ज़िया ने अपने पोस्ट में एक स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें दिखाया गया कि कथित नकली कालीन 50% की छूट पर मात्र 2,160 रुपये और 2,630 रुपये में बेचे जा रहे थे. अधिकारियों के अनुसार, असली कश्मीरी सिल्क कालीन की कीमत लाखों रुपये तक होती है, क्योंकि इसे महीनों की मेहनत और पारंपरिक तकनीक से हाथ से बुना जाता है.
नोटिस में कहा गया है कि ‘ज्वेल कारपेट’ और अमेज़न को तुरंत ऐसे भ्रामक विज्ञापन हटाने, जनता से माफी मांगने और नकली उत्पादों की बिक्री से संबंधित पूरी जानकारी देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है.
NOTICES issued 2 @jewelcarpet & @amazonIN for misbranding #KashmirCrafts
— Mussarat Zia (@mussarat_zia) August 13, 2025
They must b crazy offering 50% rebates on cheap FAKES in name of Authentic Kashmiri Handmade Silk Carpet for ₹2,160 & ₹2,630. UNACCEPTABLE. Brings disrepute 2 artisans & high value items@diprjk @dohhkmr pic.twitter.com/Aw44yxrND2
प्रशासन की सख्त चेतावनी
नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अगर कंपनियां निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट जमा नहीं करतीं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का कहना है कि यह मामला केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के पारंपरिक उद्योग और हजारों कारीगर परिवारों के भविष्य से जुड़ा है.
हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग ने यह भी कहा है कि नकली उत्पाद बेचने वालों पर सख्त नजर रखी जाएगी, ताकि कश्मीरी ब्रांड की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बनी रहे.
इस मामले ने ऑनलाइन खरीदारी करने वालों के लिए भी चेतावनी का काम किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि असली कश्मीरी कालीन की पहचान इसके बारीक डिजाइन, आईना-इमेज जैसी पिछली सतह और महीनों की मेहनत में छुपी होती है. मशीन से बने नकली कालीन में यह विशेषताएं नहीं होतीं.
कैसे पहचानें असली कश्मीरी कालीन?
अगर आप असली कश्मीरी कालीन खरीदने जाते हैं तो पहचानने के लिए सबसे पहले उसकी बुनाई देखें, यह हमेशा हाथ से बुना होता है और पीछे का डिजाइन सामने जैसा साफ दिखता है, धागों में हल्की अनियमितता भी होगी.
ये शुद्ध ऊन, रेशम या दोनों के मिश्रण से बनी होती है, जो नरम, गर्म और लचीली होती है, जबकि नकली में सिंथेटिक धागा कठोर और प्लास्टिक जैसा लगता है.
डिजाइन बेहद छोटे होते हैं, जैसे बूटेदार, पर्शियन या चिन्नार पत्तियां, और रंग प्राकृतिक या उच्च क्वालिटी डाई से बने होते हैं जो फीके नहीं पड़ते. असली कालीन में प्रति इंच ज्यादा गांठें (KPSI) होती हैं और पीछे से पैटर्न बेहद महीन दिखता है.
इसके अलावा, इसके साथ अक्सर GI टैग या प्रमाणपत्र मिलता है, जिसमें QR कोड या रजिस्ट्रेशन नंबर से असलियत जांची जा सकती है.
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Source: IOCL






















