'जो हुआ वो...', अनुच्छेद 370 पर और क्या बोले फारुख अब्दुल्ला?
Farooq Abdullah News: आर्टिकल 370 हटाए जाने के सात साल पूरे होने के बाद फारुख अब्दुल्ला ने इसकी बहाली और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई.

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के 7 साल पूरे होने के एक दिन बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला ने एक बार फिर अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी. फारुख अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग को लेकर INDIA गठबंधन के विरोध पर भी बड़ा बयान दिया.
श्रीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान फारुख अब्दुल्ला ने INDIA गठबंधन के विरोध का जिक्र करते हुए कहा, "सब जानते हैं कि 5 अगस्त को 2019 में जो हुआ वो असंवैधानिक है. इसलिए सारा देश इस समय इसके साथ है. कल आपने संसद में भी देखा जो विरोध हुआ. ये चलता रहेगा."
#WATCH | श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर | नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग को लेकर INDIA गठबंधन के विरोध पर कहा, "सब जानते हैं कि 5 अगस्त को 2019 में हुआ वो असंवैधानिक है। इसलिए सारा देश इस समय इसके साथ है। कल आपने संसद में भी देखा जो विरोध हुआ।… pic.twitter.com/X7pWMEHGju
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 6, 2026
5 अगस्त को बताया लोकतंत्र का काला दिन
इससे पहले जारी एक बयान में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने 5 अगस्त 2019 को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला दिन बताया. उन्होंने कहा कि उस दिन लिए गए फैसलों से जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक गारंटी, राजनीतिक पहचान और राज्य का दर्जा खत्म कर दिया गया.
उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने शुरुआत से ही इन फैसलों को स्वीकार नहीं किया और वे लगातार लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध कर रहे हैं.
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राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों और पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की लड़ाई आगे भी जारी रखेगी. उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार इस मुद्दे पर अपनी प्रतिबद्धता पहले भी जता चुकी है.
सरकार विधानसभा में प्रस्ताव लाकर 5 अगस्त 2019 के फैसलों को खारिज करने और जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को अपनी पहली विधायी प्राथमिकता बनाएगी. उनका कहना है कि यह लड़ाई पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से लड़ी जाएगी.
गौरतलब है कि बता दें कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था. साथ ही राज्य का पुनर्गठन कर उसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया.
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