वैष्णो देवी श्राइन विवाद पर कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, सबूत बचाने के भी आदेश
Jammu Kashmir News in Hindi: जम्मू में 'माता वैष्णो देवी' श्राइन में कथित तौर पर 550 करोड़ 'नकली चांदी' के चढ़ावे पर अदालत ने सबूतों को सुरक्षित रखने और तथ्यों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

जम्मू में 'माता वैष्णो देवी' श्राइन में कथित तौर पर 550 करोड़ रूपये के 'नकली चांदी' के चढ़ावे का विवाद अब न्यायिक जांच के अहम चरण में पहुंच गया है. जम्मू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने भवन, कटरा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस को निर्देश दिया है कि वे विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपें और सबूतों को तुरंत सुरक्षित रखने की मांग वाली अर्जी में बताए गए तथ्यों पर उचित कार्रवाई करें. मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को तय की गई है.
यह कार्यवाही वकील दीपक शर्मा द्वारा दायर एक अर्जी के बाद शुरू हुई है. उन्होंने श्राइन में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए लगभग 20 टन चांदी के चढ़ावे (जिसकी कीमत कथित तौर पर 550 करोड़ है) में मिलावट, हेरफेर, चोरी और संभावित गबन के आरोपों को लेकर शिकायत की थी.
वकील दीपक शर्मा ने 9 मई को क्राइम ब्रांच को सौंपी थी शिकायत
वकील दीपक शर्मा ने मूल रूप से 9 मई, 2026 को इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (क्राइम ब्रांच, जम्मू) और सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (क्राइम ब्रांच, इकोनॉमिक ऑफेंस विंग, जम्मू) को शिकायत सौंपी थी. जम्मू द्वारा अदालत में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, क्राइम ब्रांच को 11 मई को शिकायत मिली और आगे की कार्रवाई के लिए मंजूरी हेतु इसे 20 मई को क्राइम हेडक्वार्टर भेजा गया. क्राइम हेडक्वार्टर ने 9 जून को इसे जोनल पुलिस हेडक्वार्टर, जम्मू को भेजने की मंजूरी दी, जिसके बाद इसे 13 जून को इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, जम्मू जोन को भेजा गया.
इसके बाद मामले को जांच के लिए सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस, रियासी को भेजा गया और अंततः भवन, कटरा के डीवाईएसपी को सौंपा गया. रिपोर्ट में किसी मामले के दर्ज होने का खुलासा नहीं किया गया और बताया गया कि मामला अभी जांच के चरण में है.
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सुनवाई में कथित लेन-देन से जुड़े सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग
29 जुलाई की सुनवाई के दौरान, शर्मा ने कथित लेन-देन से जुड़े भौतिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को तुरंत सुरक्षित रखने की मांग करते हुए एक विस्तृत अर्जी दायर की. इस अर्जी में बची हुई चांदी या चांदी जैसी चीजों, सैंपल, बचे हुए हिस्सों और अवशेषों के साथ-साथ स्टॉक और वॉल्ट रिकॉर्ड, वजन और डिस्पैच रजिस्टर, जांच और लैब रिपोर्ट, सरकारी टकसाल (मिंट) के रिकॉर्ड, ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े दस्तावेज और कस्टडी की पूरी चेन के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग की गई थी.
इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को ओवरराइट किया गया, तो पड़ सकता है असर
इसमें कथित लेन-देन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक इन्वेंट्री डेटा, ऑफिशियल ईमेल, सर्वर लॉग, एक्सेस रिकॉर्ड, ऑडिट ट्रेल, अकाउंटिंग रिकॉर्ड, मिलान स्टेटमेंट और दूसरे डिजिटल सबूतों को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई थी. यह कहा गया कि अगर फिजिकल मटीरियल को और पिघलाया, रिफाइन किया या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को डिलीट या ओवरराइट किया गया, तो सबूतों की पहचान, बनावट, वजन, शुद्धता और कस्टडी की चेन पर ऐसा असर पड़ सकता है, जिसे ठीक नहीं किया जा सकेगा.
अर्जी को रिकॉर्ड पर लेते हुए, कोर्ट ने डीवाईएसपी भवन को निर्देश दिया कि वे सबूत सुरक्षित रखने की अर्जी में बताई गई बातों पर उचित कार्रवाई करें और उनके द्वारा की जा रही जांच के बारे में अगली सुनवाई की तारीख पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपें. वकील दीपक शर्मा के मुताबिक इस आदेश से लंबित जांच और संभावित रूप से महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने का मामला सीधे न्यायिक निगरानी में आ गया है. तत्काल चिंता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी फिजिकल, दस्तावेजी या इलेक्ट्रॉनिक सबूत में कोई बदलाव न हो और उसे पिघलाया, ट्रांसफर, नष्ट, डिलीट या ओवरराइट न किया जाए.
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