क्या था सूरज हत्याकांड, जिसमें IG जहूर जैदी समेत 8 पुलिसकर्मी पाए गए दोषी, इस दिन सुनाई जाएगी सजा
Suraj Murder Case in Police Custody: शनिवार को पुलिस हिरासत में आरोपी की हत्या के लिए आठ आरोपियों को दोषी ठहराया है. इन दोषियों को सजा 27 जनवरी को सुनाई जाएगी.

Himachal Pradesh News: चंडीगढ़ में सीबीआई मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश ने शनिवार को पुलिस हिरासत में आरोपी की हत्या के लिए आठ आरोपियों को दोषी ठहराया है. विशेष न्यायाधीश अलका मलिक की अदालत ने चंडीगढ़ ने फैसला सुनाते हुए आरोपी तत्कालीन आईजीपी साउथ रेंज शिमला जहूर एच. जैदी, तत्कालीन उप पुलिस अधीक्षक ठियोग, मनोज जोशी, तत्कालीन एसआई/एसएचओ पुलिस स्टेशन कोटखाई राजिंदर सिंह, तत्कालीन एएसआई दीप चंद, तत्कालीन हेड कांस्टेबल मोहाल लाल को दोषी करार दिया है.
इसके अलावा, तत्कालीन हेड कांस्टेबल सूरज सिंह, तत्कालीन हेड कांस्टेबल रफी मोहम्मद और तत्कालीन कांस्टेबल रंजीत स्टेटा को आईपीसी की धारा- 120- बी, 302, 330, 348, 218, 195, 196, 201 आईपीसी के तहत दोषी ठहराया गया है. अब इन दोषियों को सजा 27 जनवरी को सुनाई जाएगी.
क्या है पूरा मामला?
हिमाचल प्रदेश पुलिस की ओर से कोटखाई पुलिस स्टेशन में एक नाबालिग लड़की गुड़िया (काल्पनिक नाम) के साथ बलात्कार और हत्या के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी. गुड़िया का शव 6 जुलाई, 2017 को शिमला के हैलैला जंगल में मिला था.
इस मामले की जांच के लिए तत्कालीन साउथ रेंज आईजीपी शिमला जहूर एच.जैदी की अध्यक्षता में एक एसआईटी का गठन किया गया था. मामले में एसआईटी ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था. छह व्यक्तियों में से एक व्यक्ति सूरज की हिमाचल प्रदेश पुलिस की हिरासत में हिरासत में यातना के कारण मृत्यु हो गई.
लॉकअप में भी थी सूरज की हत्या
हालांकि आरोपी पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों ने अपने सह आरोपी सूरज की हत्या के लिए एक अन्य गिरफ्तार व्यक्ति राजिंदर उर्फ राजू के खिलाफ कोटखाई पुलिस स्टेशन में धारा- 302 आईपीसी के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की.
यह मामला भी हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट शिमला के आदेश पर गुड़िया मामले की प्राथमिकी के साथ जांच के लिए सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था. इन दोनों मामलों में जांच के जिम्मा सीबीआई ने ले लिया था.
झूठे रिकॉर्ड किए गए थे तैयार
गुड़िया बलात्कार और हत्या मामले में एक मात्र आरोपी अनिल उर्फ नीलू को सीबीआई ने गिरफ्तार कर आरोप पत्र दाखिल किया. आरोपी अनिल को एल.डी. ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
सूरज की हिरासत में मौत से संबंधित मामले में सीबीआई ने हिमाचल प्रदेश पुलिस के आरोपी पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, हत्या, झूठे साक्ष्य गढ़ना, साक्ष्य नष्ट करना, कबूलनामा करवाने के लिए पुलिस हिरासत में यातना देना और झूठे रिकॉर्ड तैयार करने के लिए गहन जांच के बाद आरोप-पत्र दाखिल किया.
SIT ने गलत रूप से फंसाने की कोशिश की
हिमाचल प्रदेश पुलिस की एसआईटी ने गिरफ्तार सूरज सहित सभी व्यक्तियों को सीबीआई ने निर्दोष पाया. सीबीआई के निष्कर्षों को शिमला एल.डी. ट्रायल कोर्ट ने बरकरार रखा. कोर्ट ने पाया कि उन्हें एसआईटी ने झूठा फंसाया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया.
इन मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने एल.डी. विशेष न्यायाधीश सीबीआई शिमला की अदालत से एल.डी. विशेष न्यायाधीश सीबीआई, चंडीगढ़ की अदालत में स्थानांतरित की थी.
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Source: IOCL






















