Himachal: विद्युत बोर्ड में 11.84 करोड़ का घोटाला, 3 पूर्व इंजीनियरों और निजी कंपनी के 2 निदेशकों पर FIR
Himachal News: हिमाचल में HPSEB घोटाला सामने आया. बोर्ड में करीब 11.84 करोड़ रुपए के बकाया राशि पर विजिलेंस ने 3 पूर्व इंजीनियर और दो निदेशकों पर FIR दर्ज की. बोर्ड की साख पर गंभीर सवाल खड़े हैं.

हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड (HPSEB) से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है. बोर्ड में करीब 11.84 करोड़ रुपए की बकाया राशि के मामले में, विजिलेंस ने 3 पूर्व इंजीनियरों और एक प्राइवेट कंपनी के 2 निदेशकों पर FIR दर्ज की है. यह कार्रवाई बोर्ड के चेयरमैन संजय गुप्ता की शिकायत पर दर्ज हुई है.
जानकारी के मुताबिक, बद्दी स्थित मैसर्स गिलवर्ट इस्पात प्राइवेट लिमिटेड लंबे समय से बिजली का बिल अदा नहीं कर रही थी. जब बिल की रकम काफी बढ़ गई, तो संबंधित बोर्ड अधिकारियों ने कंपनी पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय, उसे किस्तों में भुगतान की छूट दे दी और कंपनी का बिजली मीटर दोबारा चालू कर दिया.
कंपनी ने चेक बाउंस पर बिल अदा नहीं किया
शुरुआत में कंपनी ने कुछ चेक देकर बिल चुकाने का वादा किया, लेकिन बाद में चेक बाउंस हो गए. कंपनी ने बकाया भुगतान करने से पूरी तरह हाथ खींच लिया और अंततः यह राशि 11.84 करोड़ रुपए तक पहुंच गई.
इस मामले में विजिलेंस ने राजेश कुमार ठाकुर (तत्कालीन चीफ इंजीनियर ऑपरेशन), अनूप धीमान (तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ऑपरेशन), वाईआर शर्मा (तत्कालीन चीफ इंजीनियर कॉमर्शियल) सहित कंपनी के निदेशक अभिनव मौदगिल और उमेश मौदगिल को नामजद किया है.
अन्य अज्ञात अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी जांच
इसके अलावा, बिजली बोर्ड के अन्य अज्ञात अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी जांच आगे बढ़ाई जाएगी. बोर्ड के एमडी ने मार्च माह में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह विभाग) को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी. प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद, विजिलेंस ने FIR दर्ज कर दी है.
इस मामले में, बिजली बोर्ड की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आम उपभोक्ता को, जहां बिल का भुगतान न करने पर तत्काल कार्रवाई का सामना करपरना पड़ता है, वहीं करोड़ों रुपए का डिफॉल्ट करने वाली कंपनी को किस्तों की छूट और मीटर चालू करने जैसे फैसलों ने भ्रष्टाचार और मिलीभगत को हवा दे दी है.
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Source: IOCL
























