एक्सप्लोरर

Himachal: हिमाचल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अवैध कब्जों का नियमितीकरण असंवैधानिक

Himachal High Court: हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के नियमितीकरण को असंवैधानिक घोषित किया है. अदालत ने ऐसे कब्जों को हटाने और तोड़ने का खर्च कब्जाधारियों से वसूलने का आदेश दिया है.

सरकारी भूमि पर बढ़ते अवैध कब्जों पर कड़ा रुख अपनाते अपनाते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में अवैध कब्जों के नियमितीकरण को असंवैधानिक घोषित करार दिया है. न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति बिपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम की धारा 163-ए की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे मनमाना और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) का उल्लंघन बताया है.

अदालत ने कहा कि अवैध कब्जाधारकों को कानून का पालन करने वालों के बराबर मानना, अवैधता को बढ़ावा देने जैसा है और यह समानता के सिद्धांत को कमजोर करता है. अदालत ने टिप्पणी की, है कि अनुच्छेद 14 धोखाधड़ी या अवैधता को बढ़ावा देने वाले सरकारी मामलों का समर्थन नहीं करता है. राज्य सरकार की ऐसी नीति को असंवैधानिक करार दिया जो अवैध कब्जों को वैध करने की पैरवी करती हो.

'तोड़ने की लागत वसूली जाएगी'

हाईकोर्ट ने अवैध कब्जों की पूर्ण रूप से हटाने के आदेश दिए है. सरकार को सभी सरकारी भूमि से अवैध कब्जों को हटाने का निर्देश दिया गया है. अवैध कब्जों को हटाने और ढांचों को तोड़ने की लागत भी कब्जा धारकों से वसूली जाएगी. कोर्ट ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में अवैध कब्जे हुए हैं, वहां के राजस्व व वन विभाग के संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. फील्ड स्टाफ की लापरवाही या मिलीभगत पर तत्काल निलंबन और फिर सेवा से हटाने की कार्यवाही की जाए.

'स्थायी सीमा चिन्ह लगाए जाएंगे'

कोर्ट ने कहा है कि वन रक्षकों और पटवारियों को अपने क्षेत्र में प्रत्येक माह कब्जों की जानकारी या शपथ पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है. कब्जाधारियों से वसूली गई राशि का उपयोग वनीकरण अथवा अन्य पर्यावरणीय उद्देश्यों हेतु किया जाएगा. खाली कराई गई भूमि की तारबंदी कब्जाधारी के खर्च पर की जाएगी और वहां स्थायी सीमा चिन्ह लगाए जाएंगे.

जिस भूमि पर फलदार पौधे मौजूद हैं, वहां फलों को नीलामी के माध्यम से बेचा जाएगा. यदि यह संभव न हो, तो उन्हें वन्यजीवों के लिए छोड़ दिया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले की थी कड़ी आलोचना

हरियाणा बनाम मुकेश कुमार (2011) और रविंदर कौर ग्रेवाल बनाम मंजीत कौर (2019) जैसे मामलों का हवाला देते हुए अदालत ने राज्य को धारा 163 पर पुनर्विचार का सुझाव दिया है, जो अब भी राज्य भूमि पर प्रतिकूल कब्जे के माध्यम से मालिकाना हक के दावे की अनुमति देती है एक धारणा जिसकी सुप्रीम कोर्ट ने पहले कड़ी आलोचना की थी.

  • राज्य सरकार ने वर्ष 1983 से विभिन्न नीतियों के तहत अवैध कब्जों के नियमितीकरण की अनुमति दी थी. 4 जुलाई 1983 की नीति के तहत 5 बीघा तक के कब्जों को 50 रुपये प्रति बीघा शुल्क लेकर नियमित किया जा सकता था.
  • 5 से 10 बीघा तक के कब्जों पर बाजार मूल्य का तीन गुना जुर्माना.
  • 10 से 20 बीघा तक के कब्जों पर दस गुना जुर्माना.
  • 20 बीघा से अधिक कब्जा पर सीधा बेदखली का प्रावधान था.

इन दरों में 1984 और 1987 में संशोधन किया गया था. 1987 की नीति में कट-ऑफ तिथि 30 अगस्त 1982 रखी गई थी, जिसके तहत केवल वे कब्जे जो 30 जून 1970 या उससे पहले से लगातार चले आ रहे थे, उन्हें नियमित किया जा सकता था. अब अदालत ने स्पष्ट किया है कि ये सभी नीतियां कानून के शासन का उल्लंघन हैं.

सुप्रीम कोर्ट और पूर्ववर्ती आदेशों की भूमिका:

  • यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य (2011) के आदेशों की पुनः पुष्टि करता है, जिसमें अदालत ने सभी राज्यों को सरकारी और ग्राम भूमि से कब्जे हटाने के निर्देश दिए थे. अदालत ने स्पष्ट कहा था कि नियमितीकरण से अवैधता को बढ़ावा मिलता है.
  • 2016 में, HP हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जिलेवार कब्जों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. 2023 में, अदालत ने पुनः आदेश दिया था कि खाली कराई गई भूमि को तारबंदी की जाए और दोबारा कब्जे करने वालों को दंडित किया जाए.
  • इसके अलावा, अदालत ने कहा कि वन भूमि पर बिना अनुमति से बागवानी गतिविधियां जैसे सेब के बगीचे लगाना, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 का उल्लंघन है, और ऐसे बागानों को हटा कर वहां वन प्रजातियों का रोपण किया जाए.
  • अदालत ने महाधिवक्ता को निर्देश दिया है कि इस फैसले की प्रतियां मुख्य सचिव, सभी उपायुक्तों तथा संबंधित वन और राजस्व अधिकारियों को भेजी जाएं ताकि तत्काल अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके. तय समय सीमा में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है.
  • हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में वन भूमि पर सेब के पौधों को काटने के भी निर्देश दिए थे. जिस पर हिमाचल प्रदेश सरकार कार्रवाई कर रही थी लेकिन शिमला की पूर्व डिप्टी मेयर और पर्यावरण विशेषज्ञ टिकेंद्र सिंह पंवार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दर्ज की, जिसमें उन्होंने हरे पेड़ों को काटने पर रोक लगाने की मांग की थी, सुप्रीम कोर्ट ने उसे मामले में स्टे लगा दिया है और साथ में ही हिमाचल प्रदेश सरकार को यह भी निर्देश दिए हैं कि जो अवैध कब्जे हैं उनको खाली किया जा सकता है. लेकिन हरे पेड़ों को काटना बाजिव नहीं है.

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

हिमाचल के किन्नौर में मानसून आते ही बारिश का कहर, NH-5 बाढ़ से अवरुद्ध; मलबे में दबीं गाड़ियां
हिमाचल के किन्नौर में मानसून आते ही बारिश का कहर, NH-5 बाढ़ से अवरुद्ध; मलबे में दबी गाड़ियां
हिमाचल में मानूसन की बारिश बनी लोगों के लिए आफत, सड़कें बंद-बिजली गुल और पीने के पानी पर भी असर
हिमाचल में मानूसन की बारिश बनी लोगों के लिए आफत, सड़कें बंद-बिजली गुल और पीने के पानी पर भी असर
Himachal Fruits: हिमाचल से पहली बार ओमान भेजे गए ताजे चेरी और प्लम, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिली बड़ी पहचान
हिमाचल से पहली बार ओमान भेजे गए ताजे चेरी और प्लम, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिली बड़ी पहचान
Himachal News: हिमाचल में करुणामूलक रोजगार के पुराने खारिज मामलों पर बड़ा फैसला, दिया गया एक और मौका
हिमाचल में करुणामूलक रोजगार के पुराने खारिज मामलों पर बड़ा फैसला, दिया गया एक और मौका

वीडियोज

Alpha Review: Alia Bhatt और Sharvari भी नहीं बचा पाईं कमजोर कहानी
'Super Subbu' Cast Interview: Sex Education पर खुलकर बोले सितारे, कहा- हिचकिचाहट नहीं, सही जानकारी जरूरी
Ram Mandir Loot | Champat Rai | Sandeep Chaudhary: मंदिर के चढ़ावे पर डाके का पूरा सच!
Monsoon Disaster | Cloudburst in Kashmir: बादल फटा, आफत गिरी! कुपवाड़ा से अनंतनाग तक तबाही का मंजर!
Ram Mandir Donation Scam | Janhit: अग्नि परीक्षा से क्यों भाग रहे हैं ट्रस्ट के पदाधिकारी?

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
विदेशी महिलाओं का अपहरण, फिरौती और गैंगरेप... पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार का रिश्तेदार गिरफ्तार
विदेशी महिलाओं का अपहरण, फिरौती और गैंगरेप... पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार का रिश्तेदार गिरफ्तार
प्रशांत किशोर ही बांकीपुर से होंगे जन सुराज के प्रत्याशी, पार्टी बोली- 'BJP को हराना है तो…'
प्रशांत किशोर ही बांकीपुर से होंगे जन सुराज के प्रत्याशी, पार्टी बोली- 'BJP को हराना है तो…'
भरत तिवारी एनकाउंटर पर भिड़े 2 केंद्रीय मंत्री, जीतन राम मांझी के बयान पर क्या बोले चिराग, जानें
भरत तिवारी एनकाउंटर पर भिड़े 2 केंद्रीय मंत्री, जीतन राम मांझी के बयान पर क्या बोले चिराग, जानें
'वैभव सूर्यवंशी को खिलाने का सही वक्त...', इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज ने की वकालत; क्या टीम इंडिया करेगी अमल?
'वैभव सूर्यवंशी को खिलाने का सही वक्त...', इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज ने की वकालत
Alpha First Review: आलिया भट्ट की स्पाई एक्शन थ्रिलर 'अल्फा' का फर्स्ट रिव्यू आउट, देखने से पहले जान लें कैसी है ये फिल्म?
आलिया भट्ट की 'अल्फा' का फर्स्ट रिव्यू आउट, देखने से पहले जानें कैसी है ये फिल्म?
Explained: UP-पंजाब चुनाव बनेंगे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की चाबी! सरकार ने क्यों कहा- '2-3 महीने सब्र करें'?
UP-पंजाब चुनाव बनेंगे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की चाबी! सरकार ने क्यों कहा- 2-3 महीने सब्र करो
IRCTC Thailand Tour Package: मसाज का सपना होगा पूरा! IRCTC रेलवे के दाम में करा रहा थाईलैंड की सैर, रहना-खाना भी फ्री
मसाज का सपना होगा पूरा! IRCTC रेलवे के दाम में करा रहा थाईलैंड की सैर, रहना-खाना भी फ्री
कैसे बनता है किसानों का आयुष्मान कार्ड, किन-किन डॉक्युमेंट्स की होती है जरूरत?
कैसे बनता है किसानों का आयुष्मान कार्ड, किन-किन डॉक्युमेंट्स की होती है जरूरत?
Embed widget