मेट्रो-RRTS के पास 'वॉक-टू-वर्क', नई TOD पॉलिसी से FAR 100% हुआ, बनेंगे ज्यादा फ्लैट
Urban Planning India: भारत अब ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) को बड़े पैमाने पर लागू कर रहा है. यह नीति मेट्रो और RRTS कॉरिडोर के पास आवास, दफ्तर और रोजमर्रा की जरूरतों वाले शहरी क्लस्टर बनाएगी.

शहरों में रोजाना लंबी दूरी तय करने की मजबूरी को कम करने के लिए ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (Transit Oriented Development - TOD) को अब विस्तृत रूप में लागू करने की तैयारी है. केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह मॉडल मेट्रो और RRTS एवं रेलवे कॉरिडोर के आसपास ऐसे शहरी क्लस्टर बनाने पर केंद्रित है, जहां आवास, दफ्तर और रोजमर्रा की जरूरतें एक ही दायरे में उपलब्ध हों.
नई नीति के तहत मेट्रो स्टेशन और RRTS कॉरिडोर के 500 मीटर के भीतर के क्षेत्र को प्राथमिक TOD जोन माना गया है. इस दायरे में हाई-डेंसिटी, मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट के करीब रह सकें और निजी वाहनों की जरूरत घटे.
फ्लोर एरिया रेशियो में बड़ा बदलाव
फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को 65 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक करने का प्रावधान किया गया है. इससे छोटे प्लॉट्स पर भी बड़े पैमाने पर निर्माण संभव हो सकेगा. नीति के अनुसार, अतिरिक्त FAR का एक बड़ा हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए अनिवार्य किया गया है, जिससे अधिक फ्लैट बनाए जा सकें.
65 प्रतिशत फ्लैट होंगे 100 वर्गमीटर तक
नई व्यवस्था में यह स्पष्ट किया गया है कि कुल विकसित आवासीय इकाइयों में लगभग 65 प्रतिशत फ्लैट 100 वर्गमीटर या उससे कम आकार के होंगे. बाकी 35 प्रतिशत में बड़े आकार के फ्लैट शामिल किए जाएंगे. इसका मकसद मध्यम वर्ग और कामकाजी आबादी की जरूरतों को प्राथमिकता देना है.
EWS के लिए आरक्षित होगा हिस्सा
कुल FAR का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित रखा जाएगा. इससे शहर के केंद्रीय हिस्सों में भी किफायती आवास उपलब्ध कराए जा सकेंगे और सामाजिक संतुलन बना रहेगा.
मिश्रित उपयोग से ‘वॉक-टू-वर्क’ संस्कृति को बढ़ावा
इन TOD जोन में आवास के साथ-साथ ऑफिस, रिटेल, स्कूल और अन्य सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. इससे ‘वॉक-टू-वर्क’ और ‘वॉक-टू-डेली-नीड्स’ मॉडल को बढ़ावा मिलेगा, जहां लोग पैदल या साइकिल से ही अपनी जरूरतें पूरी कर सकेंगे.
30 प्रतिशत पार्किंग होगी पब्लिक यूज के लिए आरक्षित
नीति के तहत कुल पार्किंग का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है. साथ ही सड़कों पर दबाव कम करने के लिए मल्टी-लेवल पार्किंग और स्मार्ट पार्किंग सिस्टम विकसित किए जाएंगे.
पैदल और साइकिल नेटवर्क को मिलेगा बढ़ावा
TOD जोन में पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए अलग और सुरक्षित ट्रैक बनाए जाएंगे. इससे छोटी दूरी के लिए मोटर वाहनों पर निर्भरता कम होगी और शहर अधिक पर्यावरण अनुकूल बनेंगे. DDA और एजेंसियों को छोटे प्लॉट्स एकीकृत करने की जिम्मेदारी
इस योजना को लागू करने में DDA और अन्य हाउसिंग एजेंसियों को छोटे-छोटे प्लॉट्स को एकीकृत कर बड़े और सुनियोजित प्रोजेक्ट्स विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है. इससे बिखरे हुए विकास की जगह संगठित शहरी ढांचा तैयार होगा.
2000 हेक्टेयर में विकास, 18 मेट्रो और RRTS कॉरिडोर शामिल
करीब 2000 हेक्टेयर क्षेत्र में इस योजना को लागू किया जाएगा, जिसमें 18 से अधिक मेट्रो और RRTS कॉरिडोर कवर होंगे. यह अपने आप में बड़े स्तर पर शहरी पुनर्विकास की पहल मानी जा रही है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मॉडल से निजी वाहनों का उपयोग घटेगा, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में कमी आएगी. लोगों का रोजाना का समय बचेगा और उनकी उत्पादकता भी बढ़ेगी.
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Source: IOCL


























