Budget 2022: हेल्थ बजट को लेकर सरकार से क्या हैं उम्मीदें? जानें एक्सपर्ट्स की राय
कल केंद्रीय बजट 2022-23 का एलान होने जा रहा है. उम्मीद कि जा रही है कि कोरोना काल में लागू किए जा रहे दूसरे यूनियन बजट में केंद्र सरकार स्वास्थ्य को लेकर कई महत्वपूर्ण योजनाएं ला सकती है.

Union Budget 2022-23: माननीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ सोमवार से बजट सत्र की शुरुआत हो गई है. 1 फरवरी यानी मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करेंगी जिसे लेकर हर एक वर्ग कई उम्मीदें लगाए बैठा है. खासतौर पर पिछले 2 सालों में वैश्विक महामारी कोरोना ने हेल्थ केयर सिस्टम पर गहरा प्रभाव डाला है. जिसे देखते हुए पिछले साल आम बजट में स्वास्थ्य बजट में वृद्धि भी की गई और कई ऐसी योजनाएं लाई गईं, जिससे कि हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा सके.
अब एक बार फिर 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2022-23 का एलान होने जा रहा है. जिसको लेकर उम्मीद कि जा रही है कि कोरोना काल में लागू किए जा रहे दूसरे यूनियन बजट में केंद्र सरकार स्वास्थ्य को लेकर कई महत्वपूर्ण योजनाएं ला सकती है.
2021-22 में स्वास्थ्य के लिए 2,23,846 करोड़
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के फाइनेंस सेक्रेट्री डॉक्टर अनिल गोयल का कहना है कि केंद्रीय बजट 2021-22 में स्वास्थ्य के लिए 2,23,846 करोड़ रुपए का ऐलान किया गया, इस बजट में स्वास्थ्य के लिए 137 फीसदी की बढ़ोतरी की गई. साथ ही कोरोना वैक्सीन के लिए भी अलग से 35 करोड़ रुपयों का ऐलान किया गया. अभी भी देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 1.35 फीसदी ही स्वास्थ्य पर खर्च किया जाता है.
जीडीपी का 5 फीसदी खर्च हो स्वास्थ्य पर-डॉ गोयल
डॉक्टर गोयल ने कहा कि अन्य देशों में जीडीपी का 10 से 15 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च होता है, ऐसे में अपने देश में यह आंकड़ा बेहद कम है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए देश की कुल जीडीपी का करीब 5 फीसदी स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जाना चाहिए, जिससे हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया जा सके. ज्यादा से ज्यादा अस्पताल बनाए जाएं इसके साथ ही हेल्थ केयर वर्कर्स और डॉक्टरों की संख्या को भी बढ़ाई जानी चाहिए.
हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी-टैक्स हटे-डॉ गोयल
डॉक्टर गोयल ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से आयुष्मान योजना चलाई जा रही है इस योजना को बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे कि हर एक वर्ग तक इसका लाभ पहुंच सके. इसके अलावा देश के हर एक जिले में एक जिनोम सीक्वेंसिंग लैब होनी चाहिए. मेडिकल रिसर्च के लिए ज्यादा से ज्यादा लैब और हॉस्पिटल बनाए जाने चाहिए. इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस पर लगने वाली जीएसटी और टैक्स को हटाना चाहिए, साथ ही हेल्थकेयर वर्कर्स, डॉक्टर्स को टैक्स में राहत दी जानी चाहिए.
हेल्थ इंश्योरेंस के लिए बने रेगुलेटरी-डॉ अरुण
इसके अलावा दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ अरुण गुप्ता ने बताया कि फ्रांस, जर्मनी, सिंगापुर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े देशों में स्वास्थ्य सेवाएं बहुत बेहतर है. जहां हेल्थ सेवाओं में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप है. इसके साथ ही वहां पर सरकार द्वारा ही सभी स्वास्थ्य सेवाओं का वहन किया जाता है. कई देशों में हर एक व्यक्ति को हेल्थ इंश्योरेंस लेना अनिवार्य भी किया हुआ है. इसे लेकर हमारी सरकार को भी लोगों में जागरूकता बढ़ानी चाहिए और हेल्थ इंश्योरेंस का सही क्लेम लाभार्थी को मिल सके इसके लिए भी रेगुलेटरी बनानी चाहिए.
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