सौरव दास-आशुतोष रांका को इन शर्तों के साथ मिली जमानत, जंतर-मंतर का भी जिक्र
दिल्ली पुलिस ने आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी. लेकिन कोर्ट ने दोनों की रिहाई का आदेश जारी किया.

दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने 21 अक्टूबर 2026 को आशुतोष रांका और सौरव दास के मामले में अहम आदेश जारी किया. अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की पुलिस की मांग खारिज कर दी और 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड पर उनकी रिहाई का आदेश दिया. 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा था. बाद में हिरासत की अवधि दो दिन और बढ़ा दी गई, जो 21 अक्टूबर 2026 तक थी. 21 अक्टूबर को जांच अधिकारी ने अदालत में एक नया आवेदन देकर दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की. अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को होगी
पुलिस की ओर से दलील दी गई कि दोनों के आचरण, मीडिया और अदालत में दिए गए बयानों के बीच कथित अंतर और उनके रुख में बदलाव को देखते हुए कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बनी हुई है.
सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल ले जाते समय मीडिया को दिए गए एक बयान को लेकर बिना शर्त मौखिक माफी पेश की गई. आरोप था कि इस बयान से स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत की गरिमा प्रभावित हुई थी. इसके अलावा, आशुतोष रांका और सौरव दास ने अदालत में स्वेच्छा से लिखित आश्वासन दिए कि;
- वे शांति भंग करने वाला कोई काम नहीं करेंगे.
- उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है.
- जंतर-मंतर को कानूनी प्रक्रिया के तहत अधिसूचित सूची से हटाए जाने तक वहां प्रदर्शन करने का आह्वान नहीं करेंगे.
- भविष्य में होने वाले किसी भी प्रदर्शन को संविधान के दायरे में रखेंगे.
अदालत ने माना कि इस स्तर पर दोनों को आगे न्यायिक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है. आदेश के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135(3) के तहत निवारक कार्रवाई के उद्देश्य को बॉन्ड और लिखित आश्वासनों के माध्यम से पूरा किया जा सकता है.
दोनों की ओर से बॉन्ड जमा किए जाने और जमानतदारों के दस्तावेजों की प्रथम दृष्टया जांच के बाद अदालत ने तत्काल रिहाई का आदेश जारी किया. इसके लिए तिहाड़ जेल के अधीक्षक को रिहाई वारंट भेजा गया.
अदालत ने मामले में कुछ शर्तें और निर्देश भी तय किए हैं;
जांच अधिकारी अगली सुनवाई तक जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट पेश करेंगे.
दोनों प्रतिवादियों को प्रत्येक सुनवाई पर अदालत में उपस्थित होना होगा.
जमानतदारों को भी सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर उपस्थित रहना होगा.
दोनों को कानून-व्यवस्था बनाए रखनी होगी.
अदालत में दिए गए लिखित आश्वासनों का सख्ती से पालन करना होगा.
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